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भोरमदेव का अद्भुत मंदिर छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहते है इसे

भोरमदेव का अद्भुत मंदिर छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहते है इसे

भोरमदेव का अद्भुत मंदिर छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहते है इसे

भोरमदेव का मंदिर :-

भोरमदेव का मंदिर जिसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है | क्योक्मी इसकी बनावट प्राचीन मध्य भारत के खजुराहो शहर के मंदिरों के सामान है | भोरमदेव के मंदिर को चट्टानों को कांट – कांट कर बनाया गया है इसलिए ये छत्तीसगढ़ के ये भोरमदेव  मंदिर एक एतिहासिक मंदिर है |  छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव का मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत है | छत्तीसगढ़ के नए राज्य बन्ने के बाद यंहा और भी विकास हुआ है जिससे हर साल हजारो विदेशी पर्यटक भोरमदेव मंदिर के दर्शन करने पहुचते है |

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Bhoramdeo_Temple,_Kawardha

भोरमदेव का प्राकृतिक वातावरण :-

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 120 किलोमीटर और कवर्धा से मात्र २० किलोमीटर की दुरी पर है छत्तीसगढ़ का खजुराहो का खजुराहो कहे जाने वाला भोरमदेव का अतिसुन्दर मंदिर | भोरमदेव का मंदिर पर्यटन के दृष्टी से बहुत सुन्दर और सांथ प्रकृति में पहाडियों के गोद में विराजमान है|  सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के पूर्व की ओर स्थित मैकल पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे भोरमदेव मंदिर समूह धार्मिक और पुरातत्‍वीय महत्‍व के पर्यटन स्‍थल के रूप में जाना जाता है| मंदिर के पास एक कुंड (तालाब) भी है जिसकी सुंदरता और शीतलता देखते ही बन्द्ती |

वर्तमान समय में भोरमदेव मंदिर के पास एक उद्यान भी बनाया गया है जिसमे चारो तरफ रंबिरंगी अलग अलग प्रकार के फूल लगाये गये है तथा यंहा आने वाले पर्यटकों के लिए झुला झूलने और अन्य प्र कर के मनोरंजन की वयवस्था की गयी है|

भोरमदेव का इतिहास :-

भोरमदेव के मंदिर के इतिहास एक हजार साल पुराना है इस मंदिर का निर्माण 11 वी शताब्दी में नागवंशी राजा देवराय ने बनाया था | ऐसा कहा जाता है की भोरमदेव गोड राजाओ के देवता का नाम है जोकि भगवान शिव का ही नाम है |

 

 

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