
छुट्टी के दिन बुलाई विशेष बेंच, सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
शनिवार, 4 अप्रैल को अवकाश होने के बावजूद, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने विशेष सुनवाई करते हुए मामले में स्वतः संज्ञान लिया।
📊 16 हजार से ज्यादा आवेदन अटके कोर्ट ने हरिभूमि की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए पाया कि:1 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है लेकिन 16,000+ बच्चों के आवेदन अब तक लंबित हैंकुल 38,438 आवेदनों में से सिर्फ 62% (23,766) का ही सत्यापन हुआ है
⚠️ कोर्ट की प्रमुख चिंताएं धीमी सत्यापन प्रक्रिया: बड़ी संख्या में आवेदन अब भी जांच से बाहर डेडलाइन का उल्लंघन: 31 मार्च की समय सीमा के बाद भी कार्य अधूरा जिलों की खराब स्थिति: कई जिलों में 10% सत्यापन भी नहीं
👨👩👧 अभिभावकों की बढ़ी परेशानीकोर्ट ने माना कि देरी के कारण:13–17 अप्रैल की लॉटरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है अभिभावकों को बार-बार स्कूलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है
📑 सरकार को नोटिस हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिया है कि:पूरी स्थिति पर विस्तृत शपथ पत्र (Affidavit) पेश करें अब तक की कार्रवाई का स्पष्ट विवरण दें
📅 अगली सुनवाईइस जनहित याचिका (WPPIL No. 22 of 2016) पर अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।



