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मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति ग्राम अखड़ा विकास योजना

रायगढ़ में जिला स्तरीय समिति का गठन

रायगढ़ | 19 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक श्रद्धा और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु “मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति ग्राम अखड़ा विकास योजना वर्ष 2025” के क्रियान्वयन के लिए रायगढ़ जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कलेक्टर रायगढ़ करेंगे। जिला पंचायत सदस्य एवं सहकारिता तथा उद्योग समिति के सभापति श्री गोपाल अग्रवाल को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

योजना का महत्व और उद्देश्य अखड़ा जनजातीय समुदाय के लिए श्रद्धा, पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र होता है।यहाँ प्रतिवर्ष करम देव की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है।योजना का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का परिरक्षण और संवर्धन करना है।

वित्तीय प्रावधान एवं विकास कार्यप्रत्येक चयनित अखड़ा स्थल के विकास हेतु ₹5.00 लाख से ₹25.00 लाख तक की वित्तीय सहायता 1,000 तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों के लिए ₹15.00 लाख 1,000 से अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों के लिए ₹25.00 लाख राशि का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल, बैठक व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए किया जाएगा।

समिति की संरचना अध्यक्ष: कलेक्टर, जिला रायगढ़ सदस्यगण:श्री लालजीत सिंह राठिया (माननीय विधायक, धरमजयगढ़) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायगढ़ (सदस्य सचिव)कार्यपालन अभियंता, छ.ग. राज्य विद्युत वितरण कंपनी रायगढ़ कार्यपालन अभियंता, क्रेडा (CREDA) रायगढ़ कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रायगढ़ कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी रायगढ़ श्रीमती सुषमा खलखो (जिला पंचायत सदस्य) श्री गोपाल अग्रवाल (जिला पंचायत सदस्य) श्रीमती रजनी राठिया (जिला पंचायत सदस्य) श्रीमती पूर्णिमा मामरे (जिला पंचायत सदस्य) श्री रतन सिंह सिदार (सामाजिक प्रतिनिधि) श्री अनिल कुमार पाण्डे (सामाजिक प्रतिनिधि) श्री परमानंद राठिया (सामाजिक प्रतिनिधि)

पारदर्शिता एवं मॉनिटरिंग सभी स्वीकृत कार्यों की जानकारी और फोटोग्राफ MIS पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। समिति की बैठक प्रत्येक 6 माह में अनिवार्य रूप से आयोजित होगी। बैठक में कार्यों की प्रगति की समीक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

यह योजना जनजातीय समाज की आस्था और संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। शासन का यह प्रयास न केवल सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि जनजातीय समुदायों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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