रायगढ़

रायगढ़- ‘ओम श्री रुपेश स्टील प्राइवेट लिमिटेड’ के अवैध स्लैग क्रेशर की बिजली सप्लाई बंद, क्रेशर के नाम पर नहीं था कोई विद्युत कनेक्शन

रायगढ़। ग्राम चिराईपानी स्थित मेसर्स ओम श्री रुपेश स्टील प्राइवेट लिमिटेड के कथित रूप से बिना वैध पर्यावरणीय अनुमति संचालित स्लैग क्रेशर के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल , क्षेत्रीय कार्यालय रायगढ़ द्वारा जारी क्लोजर डायरेक्शन के अनुपालन में संबंधित स्लैग क्रेशर यूनिट की ओर जाने वाली विद्युत आपूर्ति बंद करा दी गई है।

कार्रवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि स्लैग क्रेशर यूनिट के नाम पर विद्युत विभाग द्वारा कभी अलग से बिजली कनेक्शन जारी ही नहीं किया गया था। जानकारी के अनुसार, मुख्य उद्योग के लिए स्वीकृत बिजली कनेक्शन से ही सड़क के दूसरी ओर स्थित इस स्लैग क्रेशर को बिजली उपलब्ध कराई जा रही थी। क्लोजर आदेश के बाद अधिकारियों ने क्रेशर की ओर जाने वाली विद्युत सप्लाई बंद करा दी, जबकि मुख्य उद्योग की बिजली यथावत रखी गई है।

यह स्लैग क्रेशर श्री शंकर लाल अग्रवाल के स्वामित्व में संचालित बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह यूनिट पिछले लगभग चार वर्षों से आवश्यक वैधानिक पर्यावरणीय अनुमति के बिना संचालित हो रही थी। मुख्य उद्योग की पिछले वर्षों की बिजली खपत एवं मीटर रीडिंग की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि बिना अलग कनेक्शन के क्रेशर संचालन में कितनी विद्युत का उपयोग किया गया।

1 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में पाया गया कि स्लैग क्रेशर बिना वैध पर्यावरणीय सहमति के स्थापित किया गया था, जो जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों का उल्लंघन है। निरीक्षण के समय उत्पादन कार्य बंद मिला। हालांकि स्थानीय लोगों के अनुसार, 18 जून 2026 को हुए हादसे तक क्रेशर में नियमित रूप से कार्य चल रहा था। दुर्घटना का शिकार हुए मजदूर इसी परिसर में कार्य करने के साथ-साथ वहीं अस्थायी झोपड़ियों में निवास भी कर रहे थे। आरोप है कि हादसे के बाद प्रबंधन द्वारा रातों-रात उन झोपड़ियों को हटाकर वहां मौजूद साक्ष्यों को भी समाप्त करने का प्रयास किया गया।

इस पूरे मामले में जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल लगातार उद्योग की कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा संभाले रहे। उन्होंने समय-समय पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, जिला प्रशासन, विद्युत विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों को शिकायतें एवं पत्र भेजकर बिना अनुमति संचालित स्लैग क्रेशर, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन, प्रदूषण, ग्रीन बेल्ट विकास संबंधी शर्तों के कथित उल्लंघन तथा अन्य अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग की। लगातार किए गए उनके फॉलो-अप के बाद विभिन्न विभागों ने जांच शुरू की और अब क्लोजर आदेश के अनुपालन में क्रेशर की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है।

पर्यावरण मंडल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्लैग क्रेशर की सभी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद रखी जाएं, संबंधित विभाग बिजली, पानी एवं अन्य शासकीय सुविधाएं तत्काल प्रभाव से विच्छेदित करें तथा वैध पर्यावरणीय सहमति प्राप्त किए बिना भविष्य में किसी भी प्रकार की उत्पादन गतिविधि प्रारंभ न की जाए। आदेश में यह भी कहा गया है कि नियमों के उल्लंघन पर उद्योग पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति भी अधिरोपित की जा सकती है।

गौरतलब है कि 18 जून 2026 को भारी बारिश के दौरान समीप स्थित महालक्ष्मी कास्टिंग की ऊंची दीवार ओम श्री रुपेश कंपनी के श्रमिक आवास पर गिर गई थी। इस हादसे में एक गर्भवती महिला एवं उसके अजन्मे शिशु की मृत्यु हो गई थी, जबकि दो अन्य श्रमिक घायल हुए थे। आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए दीवार से सटाकर अस्थायी श्रमिक आवास बनाए गए थे।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि पर स्लैग क्रेशर स्थापित किया गया, उस पर कंपनी ने अपने प्रस्ताव में ग्रीन बेल्ट विकसित करने की बात कही थी, लेकिन वहां क्रेशर स्थापित कर दिया गया। इसके अलावा बरसात के दौरान प्लांट से निकलने वाला प्रदूषित पानी आसपास के किसानों के खेतों और मुख्य मार्ग पर छोड़े जाने तथा शुष्क मौसम में धूल प्रदूषण फैलने की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि क्लोजर आदेश का उल्लंघन कर पुनः संचालन किया गया, तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 37 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 41 के तहत कठोर दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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