चिरईपानी में 3 एकड़ शासकीय जंगल भूमि पर कब्जे का आरोप: ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट, पंचायत-उद्योग की भूमिका पर भी उठे सवाल

रायगढ़। जिले के ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिरईपानी में संचालित अग्रोहा प्लांट पर शासकीय भूमि पर कब्जा करने, पेड़ों की कटाई करने और फ्लाई ऐश डंप कर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और तत्काल जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम चिरईपानी स्थित खसरा नंबर 1, प.ह. नं. 28 की लगभग 3 एकड़ शासकीय भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में “बड़े झाड़ का जंगल” के रूप में दर्ज है, उस पर उद्योग प्रबंधन द्वारा कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि भूमि पर मौजूद पेड़-पौधों और झाड़ियों को हटाकर क्षेत्र का समतलीकरण किया गया तथा बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश एवं औद्योगिक अपशिष्ट डालकर जमीन को पाट दिया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र को कांटेदार तारों से घेर दिया गया।

पहले दी अनुमति, विरोध के बाद पंचायत ने किया निरस्त
ग्रामीणों का कहना है कि प्रारंभ में ग्राम पंचायत की ओर से संबंधित कार्य के लिए अनुमति दी गई थी। लेकिन जब गांव के लोगों ने शासकीय भूमि पर किए जा रहे कार्यों का विरोध किया और आपत्ति दर्ज कराई, तब पंचायत द्वारा उक्त अनुमति को निरस्त कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि अनुमति निरस्त होने के बाद भी न तो भूमि खाली कराई गई और न ही वहां की गई घेराबंदी तथा फ्लाई ऐश डंपिंग हटाई गई। इसके बाद ग्रामीणों ने पंचायत एवं उद्योग प्रबंधन के विरुद्ध कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की।
पंचायत और उद्योग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब अनुमति वापस ले ली गई थी, तब भी संबंधित भूमि पर गतिविधियां जारी कैसे रहीं। इसी को लेकर गांव में कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ ग्रामीणों ने दबे जुबान पंचायत और उद्योग प्रबंधन के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की है।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पंचायत और उद्योग प्रबंधन की ओर से भी मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

25 से अधिक ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
महेंद्र कुमार, नटराज , दशरथ पंडा, उदय चंद्र साहू, राहुल सिंह, भावेश , नीरज सहित 25 से अधिक ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन देकर प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, शासकीय भूमि का सीमांकन कराने, कथित अतिक्रमण हटाने तथा पेड़ों की कटाई और फ्लाई ऐश डंपिंग की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल शासकीय भूमि पर कथित कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संपत्ति से भी जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाए जाते हैं।



