रायगढ़

रात में हादसा, सुबह तक गायब हो गए टिन शेड: आखिर क्या छुपा रहा है ओम श्री रूपेश उद्योग? चिराईपानी हादसे के बाद बदली घटनास्थल की तस्वीर ने खड़े किए नए सवाल

रायगढ़- चिराईपानी औद्योगिक हादसे में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद अब घटनास्थल से एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ‘खबर छत्तीसगढ़’ टीम द्वारा किए गए ग्राउंड निरीक्षण में पाया गया कि हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर लेबर क्वार्टर परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका था।

रात में हादसा हुआ और सुबह तक मजदूरों के रहने वाले बचे हुए टिन शेड भी गायब मिले। टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां केवल मलबा, टूटी हुई संरचनाएं और हादसे के निशान दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से पहले यहां कई मजदूर परिवार निवास कर रहे थे, लेकिन हादसे के बाद उन्हें अन्यत्र भेज दिया गया और परिसर लगभग खाली करा दिया गया।

आखिर क्या छुपा रहा है प्रबंधन?

हादसे के बाद घटनास्थल की बदली हुई तस्वीर ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मजदूरों को तत्काल वहां से हटाने और बचे हुए टिन शेडों को रातों-रात हटाने की आवश्यकता महसूस हुई, तो क्या पूरा परिसर पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण था? यदि ऐसा था, तो फिर मजदूर परिवारों, महिलाओं और बच्चों को इतने लंबे समय तक उसी स्थान पर क्यों रखा गया?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कार्रवाई केवल सुरक्षा कारणों से की गई या फिर घटनास्थल की वास्तविक स्थिति बदलने की जल्दबाजी दिखाई गई? इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

औद्योगिक गतिविधियों के बीच रह रहे थे मजदूर

ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों के रहने के लिए बनाए गए अस्थायी टिन शेड औद्योगिक गतिविधियों, स्लैग के ढेरों और भारी मशीनों के बेहद करीब स्थित थे। ऐसे में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बड़े नुकसान की आशंका हमेशा बनी रहती थी। उनका आरोप है कि हादसे ने उन खतरों को उजागर कर दिया, जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था।

निरीक्षण में नहीं दिखा व्यवस्थित श्रमिक आवास

‘खबर छत्तीसगढ़’ टीम के निरीक्षण में घटनास्थल पर किसी व्यवस्थित श्रमिक आवास परिसर के स्पष्ट चिन्ह दिखाई नहीं दिए। अधिकांश संरचनाएं हटाई जा चुकी हैं और पूरा क्षेत्र मलबे में तब्दील नजर आ रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या श्रमिक आवास के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

स्थानीय लोगों का दावा है कि मजदूर परिवार अस्थायी टिन शेडों में रह रहे थे। हादसे के बाद इन शेडों को भी हटाए जाने से अब घटनास्थल की मूल स्थिति और वहां मौजूद व्यवस्थाओं की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

जनप्रतिनिधियों ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग –

घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, सरपंच सहित जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और श्रमिक परिवारों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल दीवार गिरने की घटना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मजदूर आवास, सुरक्षा मानकों, औद्योगिक परिसर की व्यवस्थाओं और हादसे के बाद किए गए बदलावों की भी गहन जांच होनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच के दायरे में नया सवाल

हादसे के बाद हटाए गए टिन शेड और खाली कराए गए लेबर क्वार्टर ने पूरे मामले में एक नया प्रश्न जोड़ दिया है। जांच एजेंसियों को अब यह भी देखना होगा कि मजदूरों को किन परिस्थितियों में वहां रखा गया था, आवासीय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और हादसे के बाद इतनी तेजी से परिसर खाली कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन घटनास्थल की बदली हुई तस्वीरें यह संकेत जरूर दे रही हैं कि चिराईपानी हादसे की कहानी केवल दीवार गिरने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपे कई सवालों के जवाब अभी सामने आना बाकी हैं।

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