रायगढ़

जंगल में प्यास, बस्ती में खौफ: जान बचाने घर में घुसी कोटरी, कुत्तों ने किया लहूलुहान

रायगढ़ में गर्मी का असर—भोजन-पानी के संकट से वन्यजीवों का पलायन, वन विभाग की लेटलतीफी पर सवाल

रायगढ़ | छत्तीसगढ़ के जंगलों में भीषण गर्मी ने वन्यजीवों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। जलस्रोतों के सूखने और भोजन की कमी के चलते अब जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। ताजा मामला ग्राम चिरईपानी में सुबह सामने आया, जब एक घायल कोटरी (हिरण की प्रजाति) अपनी जान बचाने के लिए एक ग्रामीण के घर में घुस गई।

आंगन बना शरणस्थली, मच गया हड़कंप – सुबह करीब 7:30 बजे, मनोज डनसेना के घर के पास भटक रही एक कोटरी पर अचानक आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए भागती कोटरी सीधे घर के आंगन में जा घुसी। लेकिन कुत्तों का झुंड इतना आक्रामक था कि वे आंगन के अंदर तक घुसकर उस पर हमला करते रहे।

ग्रामीणों की हिम्मत से बची जान – घर के लोगों और आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत लाठियों और पत्थरों से कुत्तों को खदेड़ा। तब तक कोटरी बुरी तरह घायल हो चुकी थी—उसके पैरों और पिछले हिस्से पर गहरे घाव थे और वह भय से कांप रही थी। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी।

डेढ़ घंटे की देरी, उठे सवाल – सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम करीब 1 घंटा 45 मिनट बाद (सुबह 9:15 बजे) मौके पर पहुंची। इस देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में तत्काल कार्रवाई जरूरी थी।

इलाज के बाद जंगल में छोड़ा – वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कोटरी का प्राथमिक उपचार किया। उसकी स्थिति स्थिर होने पर उसे देलारी के जंगल में छोड़ दिया गया। आजाद होते ही कोटरी तेजी से जंगल की ओर भाग गई।

बड़ा सवाल: क्या सिर्फ कागजों में हैं इंतजाम?यह घटना वन विभाग के उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें जंगलों में पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था की बात कही जाती है।अगर जंगलों में संसाधन होते, तो शायद वन्यजीवों को बस्ती की ओर नहीं आना पड़ता।

दोहरी चुनौती – जंगल में पानी और भोजन का संकट

गांवों में आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा

यह स्थिति अब वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी जोखिम बनती जा रही है।

प्रशासन को चाहिए कि:जंगलों में कृत्रिम जलस्रोत (वॉटर टैंक/पात्र) बनाए जाएं

वन्यजीवों के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

गांवों में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण अभियान चलाया जाए

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