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“रेलवे हादसे में चेयरमैन पर FIR क्यों नहीं?” — छत्तीसगढ़ त्रासदी पर सांसद नवीन जिंदल का सिस्टम से तीखा सवाल

📍 रायपुर/रायगढ़ — छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट में 20 श्रमिकों की मौत के बाद अब कानूनी प्रक्रिया को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

कुरुक्षेत्र से सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल ने इस मामले में अनिल अग्रवाल (चेयरमैन, वेदांता समूह) के खिलाफ दर्ज FIR पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन के ‘दोहरे मापदंड’ पर सवाल खड़े किए हैं।

सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि न्याय की कसौटी सबके लिए समान होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया—“जब भारतीय रेल या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में बड़े हादसे होते हैं, तो क्या उनके चेयरमैन को नामजद किया जाता है? अगर नहीं, तो निजी क्षेत्र के लिए अलग मानक क्यों?”

जांच और जवाबदेही पर जोर — जिंदल ने स्पष्ट किया कि हादसे में जान गंवाने वाले 20 श्रमिकों के परिवारों को उचित मुआवजा,आजीविका सहायता,त्वरित न्याय मिलना अनिवार्य है।हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तथ्यों और तकनीकी जांच पर आधारित होनी चाहिए।उनके अनुसार, अनिल अग्रवाल जैसे उद्यमी को बिना प्रारंभिक जांच के FIR में शामिल करना न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

#ViksitBharat और निवेश का भरोसा — नवीन जिंदल ने आगाह किया कि भारत के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेशकों का सिस्टम पर भरोसा बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि यदि जांच से पहले ही शीर्ष नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया जाएगा, तो इससे देश के निवेश माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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