रायगढ़

तालाब सुखाकर कुंभकर्णी नींद में सो गया सिस्टम! चिराईपानी में बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, पंचायत ने झोंका गाँव को संकट में

तालाब खाली… सिस्टम फरार! चिराईपानी में जलसंकट से त्राहिमाम

रायगढ़ – एक तरफ सरकार जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और मनरेगा के जरिए ग्रामीणों को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं रायगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी से प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गाँव का प्रमुख जलस्रोत माने जाने वाले ‘बड़े तालाब’ को सौंदर्यीकरण और गहरीकरण के नाम पर लगभग तीन महीने पहले पूरी तरह खाली करा दिया गया, लेकिन उसके बाद से आज तक न खुदाई शुरू हुई, न मजदूर पहुँचे और न मशीनें। नतीजा यह हुआ कि भीषण गर्मी में पूरा गाँव बूंद-बूंद पानी के संकट से जूझ रहा है।

तालाब सुखाया, फिर काम ही भूल गए जिम्मेदार – ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा तालाब गहरीकरण का प्रचार किया गया और तकनीकी प्रक्रिया का हवाला देते हुए तालाब का पूरा पानी निकलवा दिया गया। नियमों के अनुसार पानी खाली होने के तुरंत बाद खुदाई और निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए था, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी ठोस कार्ययोजना, ले-आउट और समयबद्ध तैयारी के ही तालाब खाली करा दिया गया, जिससे पूरे गाँव की जल व्यवस्था चरमरा गई।

निस्तारी और मवेशियों के पानी का संकट गहराया – चिराईपानी का यह बड़ा तालाब ग्रामीणों और मवेशियों के लिए गर्मियों में सबसे बड़ा सहारा माना जाता था। तालाब सूखने के बाद अब ग्रामीणों को निस्तारी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है, जबकि मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है।

गाँव के लोगों का कहना है कि यदि समय पर काम शुरू नहीं करना था, तो आखिर तालाब का पानी खाली करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?

भूजल स्तर पर भी पड़ा सीधा असर – ग्रामीणों के अनुसार तालाब सूखने के बाद गाँव के कई हैंडपंप और कुएँ भी प्रभावित होने लगे हैं। क्षेत्र का यह तालाब आसपास के भूजल स्तर को रीचार्ज करने का प्रमुख स्रोत था। लगातार तीन महीने तक तली सूखी रहने से जलस्तर नीचे चला गया है और अब पीने के पानी का संकट भी गहराने लगा है।

मनरेगा के दावों की खुली पोल – यदि यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत स्वीकृत था, तो गर्मियों के इस समय ग्रामीण मजदूरों को गाँव में ही रोजगार मिलना चाहिए था। लेकिन कार्य बंद पड़े रहने से ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

इस स्थिति ने शासन के रोजगार और जल संरक्षण संबंधी दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

तकनीकी नियमों की अनदेखी के आरोप – तकनीकी गाइडलाइन के अनुसार किसी भी जल संरचना को खाली करने से पहले फंड, तकनीकी स्वीकृति, ले-आउट और कार्य योजना पूरी तरह तैयार होना जरूरी माना जाता है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि:-

क्या बिना तकनीकी तैयारी के तालाब खाली कराया गया?

क्या संबंधित उपअभियंता ने स्थल निरीक्षण के बिना अनुमति दी?

या पंचायत स्तर पर मनमानी करते हुए पानी निकलवा दिया गया?

दोनों ही स्थितियों में गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।

बरसात से पहले बढ़ी ‘कागजी काम’ की आशंका – मई समाप्ति की ओर है और मानसून की दस्तक कभी भी हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बारिश से पहले खुदाई पूरी नहीं हुई और तालाब दोबारा भर गया, तो फिर तालाब सुखाने का औचित्य क्या था?

क्षेत्र के कई जागरूक नागरिकों का कहना है कि कहीं यह केवल कागजों में कार्य दिखाकर शासकीय राशि के दुरुपयोग की तैयारी तो नहीं? क्योंकि बारिश के बाद वास्तविक खुदाई का आकलन करना मुश्किल हो जाएगा।

जांच हुई तो तकनीकी अमले पर भी गिर सकती है गाज – सूत्रों के अनुसार यदि जांच में तकनीकी अमले की लापरवाही, मूक सहमति या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित उपअभियंता सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

नियमों के तहत बिना विधिवत प्रक्रिया और कार्य प्रारंभ किए जल संरचना खाली कराने को गंभीर प्रशासनिक त्रुटि माना जाता है। ऐसी स्थिति में निलंबन, वित्तीय वसूली और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

प्रशासन के सामने बड़े सवाल

1. जब तत्काल कार्य प्रारंभ कराने की तैयारी नहीं थी, तो तालाब खाली करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया?

2. ग्रामीणों को जल संकट में धकेलने के लिए जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधियों और तकनीकी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?

3. यदि बारिश से पहले कार्य पूरा नहीं हुआ, तो शासकीय राशि और योजना की जवाबदेही कौन तय करेगा?

क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।‘खबर छत्तीसगढ़’ की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जल्द ही संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।

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