लोईंग में सुशासन का शंखनाद: 869 अर्जियां, 300 का मौके पर निपटारा; जनता के द्वार पहुँचा प्रशासन

रायगढ़ | 5 मई 2026 – रायगढ़ जिले के लोईंग में आज ‘सुशासन तिहार’ के आयोजन के साथ सरकार और जनता के बीच की दूरियां मिटती नजर आईं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के “संवाद से समाधान” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन स्वयं ग्रामीणों के द्वार पर पहुँचा। शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही दिन में 869 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 300 से अधिक समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया।
21 पंचायतों की समस्याओं पर ‘फुल स्टॉप’-
लोईंग क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली 21 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण सुबह से ही उत्साह के साथ शिविर स्थल पर पहुँचने लगे थे। प्रशासन ने न केवल उनकी शिकायतें सुनीं, बल्कि संबंधित विभागों के माध्यम से उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर त्वरित निराकरण की प्रक्रिया भी शुरू की। जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित आवेदनों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
किसी को मिली छत, कोई बना ‘लखपति’-
शिविर में केवल फाइलों का निपटारा नहीं हुआ, बल्कि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र हितग्राहियों के हाथों में सौंपा गया-
आवास का सपना सच- 5 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके नए घर की चाबियाँ सौंपी गईं।
सशक्त नारी- एनआरएलएम के तहत 5 महिलाओं को “लखपति दीदी” प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके आर्थिक स्वावलंबन को सराहा गया।
किसान और श्रमिक कल्याण- किसानों को नलकूप खनन, पंप प्रतिष्ठान और चेक वितरित किए गए, वहीं श्रमिकों को मौके पर ही श्रम कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए।
भीषण गर्मी पर भारी पड़ा उत्साह – मई की तपती धूप और भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई। शिविर स्थल पर कूलर, ठंडा पेयजल, ओआरएस घोल और भोजन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर सैकड़ों लोगों ने निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच कराई और दवाइयां लीं। साथ ही, आधार कार्ड अपडेट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सेवाओं के लिए युवाओं की भारी भीड़ देखी गई।

प्रशासनिक अमले की मौजूदगी – शिविर में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुषमा खलखो, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुजाता चौहान सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारी और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
यह ‘सुशासन तिहार’ केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और शासन की पारदर्शिता का संगम साबित हुआ।



