महालक्ष्मी प्लांट की लापरवाही से सड़क बनी तालाब, जलभराव से आवागमन प्रभावित; ग्रामीणों में आक्रोश

चिराईपानी (विशेष संवाददाता): चिराईपानी स्थित महालक्ष्मी प्लांट के बाहर इन दिनों भारी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट परिसर में समुचित ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्षा एवं प्लांट परिसर का पानी मुख्य गेट से निकलकर सीधे सड़क पर बह रहा है। इसके चलते मुख्य मार्ग पर करीब दो फीट तक पानी भर जा रहा है, जिससे आवागमन बाधित हो गया है और सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर लगातार पानी बहने से कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। पैदल राहगीरों, स्कूली बच्चों तथा दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना जोखिम उठाकर इस मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सड़क से बहता पानी आसपास के खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है।
पहले भी हो चुका है जानलेवा हादसा –
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पूर्व जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी के दबाव से प्लांट की एक बाउंड्री वॉल गिर गई थी। इस हादसे में समीप स्थित झोपड़ी में रह रहे एक मजदूर की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रबंधन ने स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं बनाई।

“बरसात के पानी में हम क्या कर सकते हैं”
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने जलभराव और सड़क पर बह रहे पानी को लेकर प्लांट प्रबंधन से शिकायत की, तो प्रबंधन ने यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि “यह तो बरसात का पानी है, इसमें हम क्या कर सकते हैं?” वहीं यह भी कहा गया कि सड़क और नाली बनवाना शासन का काम है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्लांट परिसर के भीतर वैज्ञानिक एवं पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था होती, तो पानी सड़क पर नहीं आता और यह समस्या उत्पन्न नहीं होती।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी चिंता
सड़क पर लगातार जलभराव रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा सता रहा है। वहीं सड़क की बदहाल स्थिति के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-
प्लांट परिसर के भीतर तत्काल स्थायी एवं वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था बनाई जाए।
सड़क पर हो रहे जलभराव को तुरंत समाप्त किया जाए।
क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत प्लांट प्रबंधन द्वारा कराई जाए।
किसानों की फसलों एवं भूमि को हुए नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए।
संबंधित विभाग प्लांट की जल निकासी व्यवस्था एवं पर्यावरणीय मानकों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करें।
ग्रामीणों की चेतावनी – ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही जलभराव की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समक्ष आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि बरसात के दौरान सड़क पर दो फीट तक पानी भर जाना आम लोगों की जान से खिलवाड़ है और भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी आशंका बनी हुई है।



