90 करोड़ की सड़क का डेढ़ साल में निकला दम, 2030 तक कैसे चलेगी? जर्जर सड़क ने ली नवविवाहिता की जान, 5 घंटे चक्काजाम

रायगढ़। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर रायगढ़-पूंजीपथरा मार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। केलो डैम के पास स्कूटी सवार 28 वर्षीय नवविवाहिता सुनीता यादव की एक अज्ञात भारी वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद सड़क की बदहाल स्थिति और गायब पट्टियों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। विरोध में ग्रामीणों ने शाम करीब 5 बजे से रात 9:30 बजे तक लगभग पांच घंटे चक्काजाम किया।

राखी बांधने मायके जा रही थीं सुनीता, रास्ते में थम गई जिंदगी – प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतका की पहचान ग्राम लाखा निवासी स्व. श्री सुखदेव यादव की 28 वर्षीय पुत्री श्रीमती सुनीता यादव के रूप में हुई है। सुनीता का विवाह 7 मई 2025 को रामेश्वर के साथ हुआ था।
रक्षाबंधन के दिन शाम करीब 4 बजे सुनीता अपने पति के साथ स्कूटी क्रमांक CG-13-AA-0381 से रायगढ़ से अपने गांव लाखा की ओर जा रही थीं। इसी दौरान केलो डैम के पास एक अज्ञात भारी वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में सुनीता की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद वाहन मौके से फरार हो गया। पुलिस द्वारा मामले की जांच करते हुए अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है।

90 करोड़ की सड़क, जनवरी 2025 में कार्यपूर्णता और जनवरी 2030 तक DLP
हादसे के बाद सड़क की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार सड़क की कार्यपूर्णता की संभावित तिथि 09 जनवरी 2025 बताई गई है। कार्य समाप्ति के बाद पांच वर्ष की परफॉरमेंस अवधि/डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) निर्धारित है। इस आधार पर सड़क की DLP अवधि जनवरी 2030 तक मानी जा रही है।

करीब 90 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क के DLP अवधि में रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार मेसर्स बी.बी. वर्मा, कोरबा की बताई जा रही है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब सड़क अभी अपनी पांच वर्ष की DLP अवधि में है, तो निर्माण पूर्ण होने के करीब डेढ़ वर्ष के भीतर ही सड़क की स्थिति को लेकर गंभीर शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

50 किलोमीटर में गायब पट्टियां, उखड़ा डामर – स्थानीय लोगों के अनुसार रायगढ़ से कुडुमकेला तक लगभग 50 किलोमीटर के हिस्से में सड़क किनारे की पट्टियां कई स्थानों पर पूरी तरह गायब हैं, जबकि कई जगहों पर डामर भी उखड़ चुका है।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही वाले इस मार्ग पर सड़क किनारे पट्टियों का न होना छोटे वाहनों के सुरक्षित आवागमन को प्रभावित कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

हादसे में सुनीता की मौत का प्रत्यक्ष कारण अज्ञात वाहन की टक्कर है। हालांकि सड़क की वर्तमान स्थिति ने सड़क सुरक्षा और विभागीय रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे और सड़क की स्थिति के बीच प्रत्यक्ष कारण का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।

जिला पंचायत में PWD के बयान पर गोपाल अग्रवाल ने उठाए सवाल –
जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल ने PWD अधिकारियों द्वारा जिला पंचायत की बैठक में सड़क की स्थिति को लेकर दिए गए कथित बयान पर गंभीर आपत्ति जताई है।
गोपाल अग्रवाल के अनुसार बैठक में PWD अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि “सड़क में कोई भी खराबी नहीं है।
”उन्होंने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर सड़क को पूरी तरह ठीक बताया गया था, तो जमीनी स्तर पर कई हिस्सों में गड्ढे, उखड़ा हुआ डामर और सड़क किनारे गायब पट्टियां कैसे दिखाई दे रही हैं?
उन्होंने सड़क की पूरी लंबाई का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराने और विभागीय दावे तथा जमीनी स्थिति के बीच अंतर पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक चला चक्काजाम – हादसे के बाद मृतका के परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। जर्जर सड़क, गायब पट्टियों और लगातार हो रही दुर्घटनाओं के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

शाम करीब 5 बजे शुरू हुआ चक्काजाम रात 9:30 बजे तक जारी रहा। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल मरम्मत, गायब पट्टियों को दुरुस्त करने, सड़क की तकनीकी जांच तथा अज्ञात वाहन की पहचान कर कार्रवाई की मांग की।
मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों एवं परिजनों से चर्चा कर उन्हें समझाइश दी। प्रशासन की ओर से मामले में नियमानुसार कार्रवाई तथा नियमानुसार आर्थिक सहयोग प्रदान किए जाने की बात कही गई। प्रशासन की समझाइश और आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया और यातायात बहाल किया गया।
अज्ञात वाहन की तलाश से लेकर सड़क की जांच तक मांग – ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसे में शामिल अज्ञात भारी वाहन की तत्काल पहचान कर चालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही रायगढ़ से कुडुमकेला तक सड़क का तकनीकी निरीक्षण, गायब पट्टियों और क्षतिग्रस्त डामर की जांच तथा DLP अवधि में ठेकेदार द्वारा किए जा रहे रखरखाव की स्थिति का परीक्षण कराया जाए।
यदि जांच में निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव या विभागीय निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल—2030 तक कैसे चलेगी सड़क?
रक्षाबंधन के दिन एक नवविवाहिता की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क, जिसकी कार्यपूर्णता जनवरी 2025 बताई जा रही है और जिसकी DLP जनवरी 2030 तक चलनी है, उसकी मौजूदा स्थिति अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जब सड़क अभी DLP अवधि में है, तो सड़क किनारे की पट्टियां क्यों गायब हैं? डामर क्यों उखड़ रहा है? और समय रहते इसकी मरम्मत क्यों नहीं हुई?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय दावों से नहीं, बल्कि तकनीकी जांच और जमीनी निरीक्षण से सामने आना चाहिए। यही जांच तय करेगी कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।



