चिरईपानी बंदरों का आतंक बेकाबू: महिलाओं-बच्चों के बाद अब पुरुष भी निशाने पर, पूरे गांव में दहशत; पलायन जैसे हालात
रायगढ़/लाखा 31 जुलाई। ग्राम चिराईपानी में आक्रामक बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को एक बार फिर बंदर ने गांव के निवासी श्याम सुंदर डांसेना पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे हमलों ने पूरे गांव में भय और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
कल (गुरुवार) आक्रामक बंदर ने श्रीमती कमला पंडा, पति लक्ष्मण पंडा पर उस समय हमला कर दिया था, जब वे नहाने के लिए चिराईपानी नाला जा रही थीं। हमले में उनके सिर और हाथ पर गंभीर चोटें आईं। सिर पर 12 टांके लगाने पड़े तथा प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सरायपाली स्वास्थ्य केंद्र से रायगढ़ रेफर किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार, पहले बंदर महिलाओं और बच्चों को निशाना बना रहे थे, लेकिन अब पुरुषों पर भी हमले शुरू हो गए हैं। लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने और महिलाएं दैनिक कार्यों के लिए बाहर निकलने से घबरा रही हैं। गांव में अब पलायन जैसे हालात बनने लगे हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग की टीम के हाथ केवल शांत (गैर-आक्रामक) बंदर लग रहे हैं, जबकि लोगों पर लगातार हमला करने वाला आक्रामक बंदर अभी भी पकड़ से बाहर है। इसी कारण ग्रामीणों में भय लगातार बढ़ रहा है और लोग तत्काल प्रभावी रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं।
कारणों की भी हो गहन जांच
ग्रामीणों का कहना है कि केवल बंदर को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इस पूरी स्थिति के मूल कारणों की भी गंभीर जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण का असर आसपास के जंगलों पर पड़ रहा है। यदि जंगलों में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन और सुरक्षित आवास कम हो रहे हैं, तो वे भोजन की तलाश में गांवों की ओर आने को मजबूर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग, पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले का वैज्ञानिक अध्ययन कराकर स्थायी समाधान तैयार करने की मांग की है।
घायलों को मुआवजा देने की मांग
लगातार हो रहे हमलों में घायल हुए ग्रामीणों के उपचार में आर्थिक बोझ बढ़ने की बात कहते हुए ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से घायलों को उचित मुआवजा एवं उपचार सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वन्यजीवों के हमलों में घायल हुए लोगों को शासन की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो मानव और वन्यजीव के बीच गंभीर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू कर आक्रामक बंदर को पकड़ने, ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।



