
📍 रायगढ़ | 18 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का छोटा सा गांव चपले आज देशभर में जल प्रबंधन और ग्रामीण नवाचार का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। जब एक ओर किसान बिजली बिल और सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं, वहीं यहां बिना बिजली और डीजल के नदी का पानी खुद-ब-खुद ऊंचाई तक पहुंचाया जा रहा है।
🔍 कैसे हुआ यह ‘कमाल’? — यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रशासन की सटीक साझेदारी का नतीजा है।मांड नदी पर बने एनीकट में एक विशेष हाइड्रोपंपिंग टरबाइन स्थापित की गई है, जो नदी के बहाव की ऊर्जा से ही संचालित होती है।
🔌 न बिजली, न डीजल — पूरी तरह प्राकृतिक बहाव पर आधारित
📏 1 किलोमीटर तक जल आपूर्ति — नदी से गांव के सूखे तालाब तक
🔄 24×7 संचालन — जब तक नदी में बहाव है, पंप लगातार काम करता है

🌾 किसानों के लिए बदली तस्वीर — जो खेत गर्मी में सूख जाते थे, वहां अब हरियाली लौट आई है। सिंचाई की लागत लगभग शून्य हो गई है।“पहले हम बारिश के भरोसे रहते थे, अब नदी खुद हमारे खेतों तक आ रही है। बिना बिजली बिल के सिंचाई हमारे लिए सपने जैसा है।”— दिनेश पटेल, स्थानीय किसान
🤝 विज्ञान और प्रशासन का सफल मॉडल — इस परियोजना को सफल बनाने में आईआईएससी बेंगलुरु के विशेषज्ञों की तकनीकी भूमिका और जिला प्रशासन के नेतृत्व का अहम योगदान रहा। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया।

🌍 क्यों है यह मॉडल खास? — चपले का यह प्रयोग सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी इलाकों के लिए उम्मीद की किरण है—जहां बिजली की कमी है, सिंचाई संसाधन सीमित हैं और खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
👉 संदेश साफ है: सही तकनीक और इच्छाशक्ति हो, तो प्रकृति ही सबसे बड़ी ‘मशीन’ बन सकती है।



