
रायपुर/रायगढ़ | ब्यूरो रिपोर्ट
प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और जमीन की कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ‘औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015’ में संशोधन कर अब उद्योगों को उनकी वास्तविक क्षमता और निवेश के आधार पर ही भूमि आवंटित की जाएगी। इस कदम से जहां फंसी हुई जमीनें मुक्त होंगी, वहीं गंभीर निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
अब निवेश के आधार पर ही मिलेगा भू-आवंटन
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब मनमाने तरीके से जमीन नहीं मिलेगी,नई व्यवस्था के तहत-
सूक्ष्म उद्यम- अधिकतम 1,000 वर्गमीटर
लघु एवं मध्यम उद्योग- 1 से 5 हेक्टेयर
वृहद एवं मेगा प्रोजेक्ट- 25 हेक्टेयर से अधिक जमीन केवल ₹100 करोड़ से ऊपर निवेश पर
इससे बड़े भू-खंडों की जमाखोरी पर रोक लगेगी और वास्तविक उपयोग सुनिश्चित होगा।
पहली बार ‘पार्शियल सरेंडर’ की सुविधा
नई गाइडलाइन में उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए ‘आंशिक समर्पण’ की प्रक्रिया आसान बनाई गई है
उद्योग अपनी 50% तक जमीन वापस कर सकते हैं
मूल आवंटी नए निवेशक का प्रस्ताव दे सकता है
इसके लिए 20% अतिरिक्त प्रीमियम देना होगा
इससे निष्क्रिय पड़ी जमीन दोबारा उपयोग में आ सकेगी।
इन क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव
सरकार ने उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए हैं
भू-खण्डों का एकीकरण – दो प्लॉट जोड़कर बड़ा प्रोजेक्ट संभव
एप्रोच रोड की सुविधा- रास्ता न होने पर अलग से भूमि पट्टा
स्वामित्व बदलाव में राहत- 51% हिस्सेदारी बरकरार रहने पर ट्रांसफर शुल्क नहीं
पट्टा निरस्त हुआ तो भारी पड़ेगा
नियमों के उल्लंघन या समय पर प्रोजेक्ट शुरू न करने पर अब सख्त आर्थिक दंड लगाया जाएगा
प्रावधान शुल्क / जुर्माना /मुख्य शर्त
पट्टा बहाली (7 मार्च 2015 से पहले); प्रचलित प्रीमियम का 45%, 5 साल तक ट्रांसफर प्रतिबंध
पट्टा बहाली (7 मार्च 2015 के बाद),प्रचलित प्रीमियम का 25%, उल्लंघन पर सख्ती
आंशिक समर्पण , प्रीमियम का 20% ; केवल चालू इकाइयों के लिए
बैंक/NCLT नीलामी , 10% शुल्क , नए निवेशकों को बढ़ावा
सेवा क्षेत्र , लघु उद्योग दर का 4 गुना , स्वीकृत उपयोग के अनुसार
उद्योगों के लिए ‘गेम चेंजर’ फैसला
सरकार का यह कदम औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षों से अटकी जमीनों को मुक्त कराने की दिशा में अहम माना जा रहा है। खासकर रायगढ़ जैसे औद्योगिक हब में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा, जहां कई प्लॉट विवादों या अधूरी प्रक्रियाओं के कारण लंबे समय से बंद पड़े हैं।
नई नीति से साफ संकेत है—जमीन अब सिर्फ उन्हीं को मिलेगी जो वास्तव में निवेश और उत्पादन करना चाहते हैं।
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