लैलुंगारायगढ़

लैलूंगा में तीन माह के मुफ्त राशन वितरण पर सवाल: कई हितग्राहियों को कम राशन मिलने की शिकायत, पूर्ण उठाव के बाद भी स्टॉक गायब होने के आरोप

लैलूंगा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पात्र हितग्राहियों को तीन माह का निःशुल्क राशन उपलब्ध कराने की योजना को लेकर लैलूंगा विकासखंड में गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अनेक हितग्राहियों को निर्धारित तीन माह के बजाय केवल एक या दो माह का ही राशन दिया गया है। वहीं कुछ स्थानों पर राशन वितरण और स्टॉक की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग अब तेज हो गई है।

कई पंचायतों से सामने आई शिकायतें – ग्रामीणों का कहना है कि विकासखंड के विभिन्न गांवों में बड़ी संख्या में हितग्राहियों को शासन द्वारा निर्धारित मात्रा में राशन नहीं मिला है। कई लोगों का दावा है कि तीन माह के राशन की जानकारी होने के बावजूद वितरण के दौरान उन्हें केवल एक या दो माह का ही चावल दिया गया। इससे पात्र हितग्राहियों में असंतोष व्याप्त है।

मई माह में सीमित वितरण का आरोप – कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित उचित मूल्य दुकान में मई माह के दौरान केवल लगभग 50 हितग्राहियों को ही राशन का वितरण किया गया, जबकि दुकान से जुड़े कुल हितग्राहियों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वितरण रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक लाभार्थियों के सत्यापन से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

गोदामों से पूरा उठाव, फिर राशन कहां गया?

स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के गोदामों से उचित मूल्य दुकानों के लिए तीन माह के कोटे का चावल उठाया जा चुका है। इसके बावजूद अनेक हितग्राहियों द्वारा पूरा राशन नहीं मिलने की शिकायत की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने दुकानों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी लेने का प्रयास किया, तो वहां भी चावल का कोई विशेष शेष स्टॉक दिखाई नहीं दिया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि तीन माह का राशन गोदामों से जारी और उठाव किया जा चुका था तथा अधिकांश हितग्राहियों को पूरा राशन भी नहीं मिला, तो शेष चावल कहां गया।

खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल – मामले को लेकर ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राशन वितरण प्रणाली की नियमित निगरानी और भौतिक सत्यापन प्रभावी ढंग से किया जाता, तो ऐसी शिकायतों की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है।

परिवहन व्यवस्था की भूमिका की जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि गोदाम से उचित मूल्य दुकानों तक राशन पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि वितरण श्रृंखला के प्रत्येक चरण का सत्यापन किए बिना वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकेगी। इस कारण राशन परिवहन और वितरण से जुड़े अभिलेखों की जांच की मांग की जा रही है।

लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों को लेकर भी चर्चा – क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के कारण निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पहलू की भी समीक्षा करने की मांग की है।

उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग – ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

“शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए। यदि कहीं राशन वितरण में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।” स्थानीय ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल सामने आए आरोपों और शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच, राशन वितरण अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टर तथा संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि वह इस मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करता है या नहीं।

नोट: यह समाचार स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page