
20 मार्च को हुआ था जल महोत्सव, ग्रामीणों का दावा- कुछ दिनों बाद ही बंद हो गई जलापूर्ति; कोंडागांव और दंतेवाड़ा में कार्रवाई के बाद रायगढ़ में भी जवाबदेही की मांग
रायगढ़/बस्तर 11 जून 2026 – छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की जा रही नल-जल योजनाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर सरकार गांव-गांव जल महोत्सव आयोजित कर योजनाओं को सफल बताने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर ग्रामीणों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पा रहा है।

हाल ही में बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले के ग्राम बेड़मा तथा दंतेवाड़ा जिले के ग्राम टेकनार में जल जीवन मिशन की नई योजनाओं के बावजूद पेयजल आपूर्ति प्रभावित मिलने पर विभागीय स्तर पर सख्त रुख अपनाया गया। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव द्वारा मामले को गंभीरता से लेने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता ने कोंडागांव और दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंताओं (EE) को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया कि गर्मी के मौसम में नई जल प्रदाय योजनाओं से पानी उपलब्ध नहीं होना गंभीर लापरवाही तथा कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। साथ ही संबंधित अधिकारियों से यह पूछा गया कि ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदारी क्यों न तय की जाए।

बस्तर में कार्रवाई, रायगढ़ के परसदा में भी वही कहानी?
इसी बीच रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत परसदा से भी जल जीवन मिशन की एक योजना को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार 20 मार्च 2026 को ग्राम परसदा में बड़े स्तर पर ‘जल महोत्सव’ आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह संदेश दिया गया कि योजना सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है और ग्रामीणों को घर-घर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि महोत्सव के कुछ समय बाद ही जलापूर्ति प्रभावित हो गई। वर्तमान में कई घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच रहा है और लोग भीषण गर्मी में वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
जल महोत्सव या केवल औपचारिकता?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि योजना पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम और संचालन योग्य थी तो जल महोत्सव के कुछ ही दिनों बाद जलापूर्ति बाधित क्यों हो गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगहों पर केवल लक्ष्य पूरा करने और योजनाओं के शुभारंभ का आंकड़ा बढ़ाने के लिए जल्दबाजी में जल महोत्सव आयोजित कर दिए गए, जबकि योजनाओं की दीर्घकालिक कार्यक्षमता और स्रोत की स्थिरता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
बस्तर के लिए एक नियम, रायगढ़ के लिए दूसरा क्यों?
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कोंडागांव और दंतेवाड़ा में जलापूर्ति प्रभावित होने पर संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया जा सकता है, तो परसदा में जलापूर्ति बाधित होने की शिकायतों पर अब तक विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है?
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या परसदा की योजना की तकनीकी जांच कराई जाएगी? क्या यह पता लगाया जाएगा कि जल महोत्सव के बाद सप्लाई क्यों प्रभावित हुई? और यदि कहीं लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर भी कार्रवाई होगी?
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश – गर्मी के इस दौर में पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। यदि योजनाएं उद्घाटन और महोत्सव तक ही सीमित रह जाएं और कुछ दिनों बाद बंद हो जाएं, तो इससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिस तरह बस्तर के मामलों में विभाग ने त्वरित संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करने की पहल की, क्या उसी तरह रायगढ़ जिले के परसदा मामले में भी जांच और कार्रवाई की जाएगी या फिर ग्रामीणों को सूखे नलों के साथ ही इंतजार करना पड़ेगा।
(नोट: परसदा में जलापूर्ति प्रभावित होने संबंधी जानकारी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।) फोटो सांकेतिक
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