रायगढ़/जशपुर, 14 जून 2026। छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदिवासी एवं रेल-विहीन क्षेत्रों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रेल मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को आधिकारिक रूप से ‘विशेष रेल परियोजना’ (Special Railway Project) घोषित कर दिया है। भारत सरकार के राजपत्र में 4 जून 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन का मार्ग और अधिक स्पष्ट हो गया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 291.881 किलोमीटर लंबी यह नई रेल लाइन राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में अधिसूचित की गई है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब रेल अधिनियम, 1989 के विशेष प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जा सकेगी।
दशकों पुरानी मांग को मिली मंजूरी – जशपुर और पत्थलगांव क्षेत्र लंबे समय से रेल संपर्क से वंचित रहे हैं। क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा वर्षों से रेल लाइन की मांग उठाई जाती रही है। वर्तमान में यहां के लोगों को रेल यात्रा के लिए रायगढ़, चांपा, रांची अथवा अन्य दूरस्थ स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नई रेल लाइन के निर्माण से जशपुर जिला पहली बार सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेगा, जिससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया में आएगी तेजी – विशेष परियोजना का दर्जा मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण, सीमांकन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है। इससे परियोजना के प्रारंभिक कार्यों और निर्माण संबंधी गतिविधियों को गति मिलेगी तथा लंबे समय से लंबित यह परियोजना आगे बढ़ सकेगी।
परियोजना के प्रमुख बिंदु –
परियोजना: धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन
कुल लंबाई: 291.881 किमी
अधिसूचना प्रकाशन तिथि: 4 जून 2026
दर्जा: विशेष रेल परियोजना (Special Railway Project)
उद्देश्य: राष्ट्रीय अवसंरचना एवं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का विस्तार
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयामइस रेल परियोजना के पूरा होने पर जशपुर, पत्थलगांव और धरमजयगढ़ जैसे आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच यात्री एवं माल परिवहन अधिक सुगम और किफायती हो सकेगा।
खनिज संपदा से समृद्ध इस क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने से औद्योगिक गतिविधियों को भी बल मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भविष्य में पूर्व-मध्य भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकती है।
अब आगे क्या? – अधिसूचना प्रभावी होने के बाद संबंधित जिलों में रेलवे प्रशासन और राजस्व विभाग द्वारा भूमि सर्वेक्षण, प्रभावित भूमि का चिन्हांकन तथा मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है। विशेष परियोजना का दर्जा मिलने से निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियों और प्रक्रियाओं में अपेक्षाकृत तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस निर्णय को जशपुर अंचल की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।
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