छत्तीसगढ़ में न्याय का बड़ा अभियान: 9 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत, अगस्त में ‘समाधान समारोह’

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदेश में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इस संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत और उच्चतम न्यायालय की विशेष पहल ‘समाधान समारोह’ की तैयारियों की समीक्षा की।
9 मई को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत – प्रदेशभर में 9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के तहत अब तक 31,90,982 मामलों की पहचान की गई है, जिनमें 31,14,779 प्री-लिटिगेशन और 76,203 न्यायालयों में लंबित मामले शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिए हैं कि पुराने लंबित सिविल और आपराधिक सुलह योग्य मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें खासतौर पर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, चेक बाउंस (परक्राम्य लिखत अधिनियम) और मोटर दुर्घटना दावा मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह लोक अदालत छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से लेकर जिला, तहसील, पारिवारिक और राजस्व न्यायालयों तक आयोजित होगी। साथ ही, जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े छोटे विवादों के समाधान के लिए ‘मोहल्ला लोक अदालत’ भी लगाई जाएगी।
‘समाधान समारोह’ सुप्रीम कोर्ट मामलों का निपटारा –
उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार ‘समाधान समारोह’ अभियान के तहत लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण निपटारा किया जाएगा।
इसकी तैयारी 21 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि इसका समापन 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को प्रस्तावित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के साथ होगा।
सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पक्षकारों को शीघ्र नोटिस तामील करें और इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें।
बीमा और वित्तीय संस्थानों से समन्वय – न्यायिक अधिकारियों को बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के साथ पूर्व-बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समझौता प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को समझाइश देकर आपसी सहमति से विवादों का समाधान करना है।
इस बैठक में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू सहित राज्य के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।



