10 दिन से बाधित है सरकारी सड़क, प्रशासन खामोश: ओम श्री रूपेश कंपनी पर 4 फीट गहरी खाई खोदने, तालाब और धरसा मार्ग घेरने के आरोप

तहसीलदार का आदेश भी बेअसर? जिला पंचायत सदस्य की मौजूदगी में 3 दिन का समय मांगने के बाद भी नहीं भरा गया गड्ढा
10 दिन से प्रभावित है आवागमन, ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
गड्ढे में गिरकर किसी की जान गई तो जिम्मेदारी किसकी?
रायगढ़ – ग्राम चिरईपानी में एक शासकीय मार्ग को खोदकर अवरुद्ध किए जाने और सरकारी तालाब तक पहुंचने वाले पुश्तैनी धरसा मार्ग पर कथित अतिक्रमण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने ओम श्री रूपेश (प्रा.) लिमिटेड के खिलाफ प्रशासन और पुलिस को शिकायतें सौंपते हुए आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन की कार्रवाई से पिछले 10 दिनों से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
रात 8 बजे मुख्य मार्ग पर खोदी गई 4 फीट गहरी खाई – राजस्व विभाग द्वारा तैयार पंचनामे के अनुसार, 23 मई 2026 की रात लगभग 8 बजे चिरईपानी से गेरवानी को जोड़ने वाले मुख्य शासकीय मार्ग पर लगभग 0.057 हेक्टेयर भूमि में जेसीबी से खुदाई की गई। पंचनामे में लगभग 100 फीट लंबी, 30 फीट चौड़ी और 4 फीट गहरी खाई का उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस खुदाई के कारण गांव का मुख्य मार्ग बाधित हो गया और लोगों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

10 दिन से प्रभावित आवागमन, पुलिस कार्रवाई की प्रतीक्षा-
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर बने इस गहरे गड्ढे के कारण पिछले 10 दिनों से गांव तक एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं की पहुंच प्रभावित हुई है। स्कूली बच्चों, किसानों और राहगीरों को भी रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले को लेकर पंचायत की ओर से और ग्रामीणों की तरफ से थाना पूंजीपथरा में दो अलग-अलग लिखित शिकायतें प्रस्तुत की हैं। पुलिस द्वारा शिकायतकर्ताओं को आवेदन प्राप्त होने की विधिवत पावती भी दी गई है।

ताजा प्राप्त जानकारी और स्थानीय सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। ग्रामीणों ने निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

तहसीलदार का आदेश भी बेअसर?
सड़क बाधित होने की शिकायत पर 24 मई 2026 को राजस्व अमले ने मौके पर पंचनामा तैयार किया था। इसके बाद 27 मई 2026 को तहसीलदार ने स्वयं विवादित स्थल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल अग्रवाल भी मौजूद रहे। ग्रामीणों के अनुसार निरीक्षण के समय कंपनी पक्ष ने मार्ग को पूर्व स्थिति में बहाल करने के लिए तीन दिन का समय मांगा था। आरोप है कि समयसीमा समाप्त होने के बाद भी गड्ढा नहीं भरा गया और मार्ग आज भी बाधित है।
यही कारण है कि अब ग्रामीणों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि क्या प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना की जा रही है, अथवा कार्रवाई की प्रक्रिया अभी जारी है।
कोलीमाली तालाब और धरसा मार्ग पर भी घेराबंदी की शिकायत- ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सौंपे गए शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम चिरईपानी से कोलीमाली सरकारी तालाब तक जाने वाले पुश्तैनी धरसा मार्ग पर बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे दशकों से इस मार्ग का उपयोग करते आ रहे हैं और तालाब गांव की निस्तारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिकायत में तालाब क्षेत्र के आसपास भी घेराबंदी किए जाने का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सीमांकन कराकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा – मामले को लेकर ग्राम पंचायत लाखा के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।प्रमुख शिकायतकर्ता एवं जनप्रतिनिधि:- श्री इन्द्र कुमार पंडा (सरपंच, ग्राम पंचायत लाखा)- श्री केदारनाथ डनसेना (उपसरपंच)- श्रीमती फूलमती धनवार (जनपद सदस्य)- पंचगण: श्री भगवानों, श्री शुभम डनसेना,जुगती एक्का

ग्रामीण एवं शिकायतकर्ता:डमरूधर पंडा, जागेश्वर राजपूत, नटराज डनसेना, मनोज डनसेना, दीपक साहू, उदयचन्द्र साहू, प्रकाश शर्मा, सत्य प्रकाश, विपिन डनसेना, रंगलाल डनसेना, दशरथ पंडा, घनश्याम, शुभम, , प्रवीण यादव, शिवप्रसाद यादव, चन्द्रशेखर राजपूत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल: गड्ढे में गिरकर किसी की जान गई तो जिम्मेदारी किसकी?
सड़क के बीचों-बीच बनी लगभग 4 फीट गहरी खाई किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। बरसात का मौसम नजदीक है और रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी स्कूली बच्चे, राहगीर, किसान या दोपहिया चालक के साथ कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत, पंचनामा और प्रशासनिक निरीक्षण के बावजूद यदि मार्ग समय पर बहाल नहीं होता और कोई जनहानि होती है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल ग्रामीण प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



