कचरा प्रबंधन पर अब ‘जीरो टॉलरेंस’: 1 अप्रैल से देशभर में नए नियम लागू, उल्लंघन पर लगेगा ‘स्पॉट फाइन’

रायपुर | 13 मई 2026 – देशभर में बढ़ते कचरा संकट और प्रदूषण की चुनौती के बीच भारत सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अब जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू किए जाएंगे। माननीय उच्चतम न्यायालय के नवीन निर्देशों के परिपालन में रायपुर में आयोजित उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों ने इस दिशा में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सहमति जताई।
हर जिले में बनेगा ‘स्पेशल सेल’, कलेक्टर करेंगे निगरानी – बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जिले में कलेक्टर की निगरानी में विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell) गठित किया जाएगा। यह सेल डंपिंग साइट्स, कचरा संग्रहण और नियमों के पालन की निगरानी करेगा।
जिला कलेक्टरों को डंपिंग साइट्स का भौतिक और वर्चुअल निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई और प्रगति की रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य शासन को भेजी जाएगी।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए नियम –
भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, जिन्होंने वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान ले लिया है।
ये नियम शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों, औद्योगिक क्षेत्रों, सरकारी एवं निजी संस्थानों और आम नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे।
आम नागरिकों के लिए क्या बदला?
कचरा पृथक्करण अब अनिवार्य
अब प्रत्येक घर और संस्थान को कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग रखना होगा
गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वास्थ्यकर अपशिष्ट (डायपर, सैनिटरी पैड आदि)
विशेष देखभाल अपशिष्ट (बैटरी, पेंट कंटेनर, एक्सपायर्ड दवाइयां आदि)
खुले में कचरा फेंकने पर स्पॉट फाइन – खुले में कचरा फेंकने, जलाने, नालियों या जलाशयों में डालने पर स्थानीय निकाय मौके पर ही जुर्माना वसूल सकेंगे।
यूजर फीस देना होगा अनिवार्य – कचरा संग्रहण एवं प्रबंधन के लिए निर्धारित यूजर शुल्क का भुगतान करना अब अनिवार्य होगा।
बड़े आयोजनों पर भी सख्ती – 100 से अधिक लोगों वाले आयोजनों के लिए कम से कम 3 दिन पहले स्थानीय निकाय को सूचना देना जरूरी होगा।
तकनीक और जवाबदेही पर जोर – GPS से होगी निगरानी 50 हजार से अधिक आबादी वाले शहरों में कचरा संग्रहण वाहनों में GPS ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य किया गया है।
बड़े संस्थानों को खुद करना होगा प्रबंधन – प्रतिदिन 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले कचरे के प्रसंस्करण—जैसे कम्पोस्टिंग या बायोमिथेनेशन—की व्यवस्था करनी होगी।
अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग समय-सीमा10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को 6 माह के भीतर व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी, जबकि छोटे ग्रामीण क्षेत्रों को अधिकतम 36 माह का समय दिया गया है।
सरकार का संदेश साफ – “कचरा प्रबंधन अब नागरिक जिम्मेदारी”

बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य सरकार नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तैयार है।सरकार का स्पष्ट संदेश है कि कचरा प्रबंधन अब केवल सफाई व्यवस्था नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़ा बड़ा नागरिक अभियान होगा।
यह खबर ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों और उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक में साझा जानकारी पर आधारित है।



