
रायगढ़ | जिले में बढ़ते सड़क हादसों और उनमें हो रही मौतों को लेकर रायगढ़ पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाया है। सड़क सुरक्षा को लेकर “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम करते हुए पुलिस ने संकेत दिए हैं कि गंभीर लापरवाही से होने वाले सड़क हादसों में अब केवल सामान्य धाराओं तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत भी केस दर्ज किए जा सकते हैं।
एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के निर्देश पर हाल ही में पुसौर क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे में बिना वैध लाइसेंस भारी वाहन चला रहे आरोपी चालक के खिलाफ कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। इस मामले को पुलिस की नई सख्त कार्यप्रणाली के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई चालक तेज रफ्तार, बिना लाइसेंस, नशे की हालत में या स्पष्ट लापरवाही के साथ वाहन चलाता है और उसकी वजह से किसी की जान जाती है, तो ऐसे मामलों में केवल “दुर्घटना” मानकर सामान्य कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश – रायगढ़ पुलिस की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और वाहन चालकों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसे तरीके से वाहन चलाते हैं, जिससे गंभीर हादसे की आशंका पहले से स्पष्ट होती है।
क्या हो सकते हैं इस फैसले के सकारात्मक असर?
लापरवाह ड्राइविंग पर लगेगी रोक – कठोर धाराओं के इस्तेमाल से वाहन चालकों में कानून का डर बढ़ सकता है, जिससे तेज रफ्तार, गलत ओवरटेकिंग और बिना लाइसेंस वाहन चलाने जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
बिना लाइसेंस ड्राइविंग पर बढ़ेगी सख्ती – भारी वाहनों को बिना वैध लाइसेंस चलाने वाले चालकों और उन्हें वाहन सौंपने वाले मालिकों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

पीड़ित परिवारों को मिलेगा मजबूत कानूनी आधार – गंभीर धाराओं में कार्रवाई होने से सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को न्यायिक प्रक्रिया में अधिक मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कानूनी और व्यावहारिक चुनौतियां भी मौजूद – कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 105 BNS का उपयोग हर सड़क दुर्घटना में स्वतः नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुलिस को यह साबित करना होता है कि आरोपी को अपने कृत्य के संभावित खतरनाक परिणामों का ज्ञान था या उसने गंभीर लापरवाही बरती।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई हादसा तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति या अचानक हुई यांत्रिक समस्या के कारण हुआ हो, तो ऐसे मामलों में धारा 105 लगाने को लेकर कानूनी बहस हो सकती है।
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि अत्यधिक कठोर कार्रवाई के भय से भारी वाहन चालकों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सड़क सुरक्षा के जानकार इसे जिम्मेदार ड्राइविंग की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं।
एसएसपी का स्पष्ट संदेश – एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने कहा है कि सड़क पर वाहन चलाना एक बड़ी जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति नियमों की अनदेखी कर दूसरों की जान जोखिम में डालता है, तो पुलिस ऐसे मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करेगी। उन्होंने वाहन चालकों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने, वैध लाइसेंस और आवश्यक दस्तावेज साथ रखने की अपील भी की है।
रायगढ़ पुलिस की यह पहल केवल सख्ती दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कठोर धाराओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि कानून का उद्देश्य भी पूरा हो और न्यायिक संतुलन भी बना रहे।



