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नगरीय प्रशासन विभाग में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: नई सचिव ने खुद जांचा हाजिरी रजिस्टर, बोलीं— अब गुणवत्ता और पारदर्शिता से होगा काम!

रायपुर- शंगीता आर. ने पदभार संभालते ही साफ संकेत दे दिए हैं कि अब विभाग में ढिलाई और फाइलों की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोमवार सुबह नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन पहुंचकर उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय और सूडा (SUDA) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। सचिव के अचानक दौरे से विभागीय अमले में हड़कंप की स्थिति बन गई।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने कार्यालय के विभिन्न कक्षों का भ्रमण कर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्यप्रणाली और लंबित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने हाजिरी रजिस्टर तक खुद जांचा और कई अधिकारियों से सीधे चर्चा कर योजनाओं की प्रगति का हिसाब मांगा।

काम में लापरवाही नहीं चलेगी”- सचिव शंगीता आर. ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की योजनाओं में देरी, अनावश्यक फाइल अटकाना और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर योजना में प्रशासनिक कुशलता, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

इन योजनाओं की हुई गहन समीक्षा – बैठक के दौरान सचिव ने शहरी विकास से जुड़ी कई अहम योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की—

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने के निर्देश।

अमृत मिशन और जल प्रदाय योजनाओं की समीक्षा कर गर्मी के मौसम में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने को कहा।

शहरों की सफाई व्यवस्था, अधोसंरचना और निर्माणाधीन सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए।

11 मई बना भावुक और प्रेरक क्षण – बैठक के दौरान सचिव ने अधिकारियों के साथ अपने प्रशासनिक जीवन का एक विशेष अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 11 मई 2005 को उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपने करियर की शुरुआत की थी। अपने 21वें सेवा वर्ष की वर्षगांठ पर उन्होंने पूरी टीम से जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद – इस दौरान शशांक पाण्डेय, दुष्यंत कुमार रायस्त, पुलक भट्टाचार्य, राजेश शर्मा और मिथिलेश अवस्थी सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

नगरीय प्रशासन विभाग में नई सचिव की यह सक्रियता संकेत दे रही है कि आने वाले समय में शहरी विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और जवाबदेही पहले से ज्यादा सख्त हो सकती है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आम लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं।

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