हवा में लहराई गेड़ी, थमी दर्शकों की सांसें! इंदौर के मालवा महोत्सव में बिलासपुर के कलाकारों ने बिखेरा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग

इंदौर/बिलासपुर | मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित 25वें मालवा महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का रंग उस समय पूरे शबाब पर नजर आया, जब बिलासपुर की गेड़ी लोक नृत्य दल ने मंच पर अपनी शानदार प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा, मांदल की थाप और कलाकारों के अद्भुत संतुलन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दशहरा मैदान तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
कार्यक्रम में बिलासपुर के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गेड़ी लोक कला का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी को रोमांचित कर दिया। प्रस्तुति के दौरान नर्तक चेतन कुर्रे और लक्ष्मी नारायण के कंधों पर खड़े होकर शुभम भार्गव ने जब हवा में गेड़ी लहराई, तो दर्शकों की सांसें थम सी गईं। इस हैरतअंगेज प्रस्तुति पर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

लोक कलाकारों ने “काट ले हरिहर बाँसे…” जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों पर मांदल और लोक वाद्यों की थाप के साथ प्रस्तुति दी। इंदौर के दर्शक भी छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए और कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
इस शानदार प्रस्तुति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए दल के संचालक अनिल कुमार गढ़ेवाल को मंच पर सम्मानित किया गया। उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सम्मान प्रदान किया।
मालवा महोत्सव के मंच पर बिलासपुर की इस प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा को भी नई पहचान दिलाई।



