रफ्तार, अतिक्रमण और VIP कल्चर: लाखा से तराईमाल तक हाईवे बना अघोषित ‘गौठान’, गेरवानी VIP ढाबा के सामने अज्ञात वाहन ने 5 गायों को कुचला

रायगढ़/गेरवानी । जिले के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार, ढाबों के आसपास पसरा अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग और सड़कों पर घूमते मवेशियों का जमावड़ा अब जानलेवा साबित हो रहा है। गेरवानी स्थित VIP ढाबा के सामने मुख्य मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में 5 गायों की कुचलकर मौत हो गई। हादसे ने सड़क सुरक्षा, मवेशी प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोई चश्मदीद नहीं, मवेशियों को कुचलकर फरार हुआ अज्ञात वाहन
मिली जानकारी के अनुसार हादसा देर रात या तड़के का बताया जा रहा है। खबर लिखे जाने तक घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार अज्ञात वाहन सड़क पर बैठे मवेशियों को कुचलने के बाद मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद वाहन की पहचान नहीं हो सकी है। ऐसे में VIP ढाबा और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच हादसे की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
लाखा से तराईमाल तक मवेशियों का जमावड़ा, हादसों का बना ‘डेथ ज़ोन’
समस्या केवल गेरवानी के VIP ढाबा तक सीमित नहीं है। लाखा से लेकर तराईमाल तक मुख्य मार्ग के कई हिस्सों में रोजाना बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर बैठे या घूमते दिखाई देते हैं।
यह मार्ग औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही के लिहाज से बेहद व्यस्त है। ऐसे में सड़क के बीच मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों और राहगीरों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी और स्थायी व्यवस्था के अभाव में यह मार्ग धीरे-धीरे अघोषित ‘गौठान’ में तब्दील होता जा रहा है।
हादसों के पीछे सिर्फ रफ्तार नहीं, व्यवस्था की कई खामियां
लाखा से तराईमाल तक सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें पशुपालकों की लापरवाही से लेकर ढाबों के आसपास की अव्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी का अभाव शामिल है।
VIP मूवमेंट में सड़क साफ, आम दिनों में अनदेखी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब इस मार्ग से किसी VIP का काफिला गुजरता है, तो मवेशियों और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन तथा स्थानीय स्तर पर विशेष सक्रियता दिखाई देती है। सड़क से मवेशियों को हटाया जाता है और यातायात व्यवस्था दुरुस्त की जाती है।
लेकिन आम दिनों में यही सड़क फिर मवेशियों और अव्यवस्थित पार्किंग से घिर जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि सड़क सुरक्षा के लिए व्यवस्था केवल VIP मूवमेंट तक सीमित क्यों रहे?
कीचड़ से बचने के लिए सड़क पर बैठते हैं मवेशी
बारिश के मौसम में सड़क के दोनों ओर की कच्ची जमीन और खाली स्थानों पर कीचड़ एवं पानी जमा हो जाता है। इसके मुकाबले डामर की सड़क सूखी और अपेक्षाकृत साफ रहती है। यही वजह है कि मवेशी अक्सर सड़क पर आकर बैठ जाते हैं।
पशुपालकों की जिम्मेदारी भी तय हो
दूध देना बंद करने के बाद पशुओं को खुले में छोड़ देने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पशुपालक अपने मवेशियों को सड़क पर खुला छोड़ देते हैं तो इससे न केवल पशुओं की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि वाहन चालकों और अन्य राहगीरों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
प्रशासन को ऐसे मामलों में पशुपालकों की जिम्मेदारी तय कर प्रभावी कार्रवाई और जुर्माने की व्यवस्था करनी चाहिए।
ढाबों के आसपास फेंका जाने वाला भोजन भी बढ़ा रहा समस्या
स्थानीय लोगों के अनुसार ढाबों और सड़क किनारे खाद्य सामग्री का बचा हुआ हिस्सा फेंके जाने से भी मवेशी उन स्थानों पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो संबंधित ढाबा संचालकों को भी कचरा प्रबंधन और सड़क किनारे खाद्य अवशेष नहीं फेंकने के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से बढ़ रहा खतरा
ढाबों के आसपास सड़क किनारे भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग भी दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती है। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और कई जगह वाहन चालकों के लिए ब्लाइंड स्पॉट बन जाते हैं।
एक ओर सड़क पर मवेशी बैठे रहते हैं और दूसरी ओर भारी वाहन पार्क रहते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन चालक के सामने अचानक मवेशी आने पर हादसा टालना मुश्किल हो जाता है।
मवेशियों पर रेडियम पट्टी लगाने की जरूरत
रात के समय सड़क पर बैठे मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते। यदि मवेशियों के गले में रेडियम/रिफ्लेक्टिव पट्टी लगाई जाए तो अंधेरे में वाहन चालकों को उनकी मौजूदगी पहले से दिखाई दे सकती है।
प्रशासन और स्थानीय निकायों को पशुपालकों के सहयोग से इस दिशा में भी अभियान चलाने की जरूरत है।
CCTV फुटेज खंगालने और अज्ञात वाहन की पहचान की मांग
गेरवानी में 5 गायों की मौत की घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि VIP ढाबा और आसपास के प्रतिष्ठानों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल खंगाली जाए, ताकि हादसे को अंजाम देने वाले वाहन की पहचान हो सके।
इसके साथ ही लाखा से तराईमाल तक पूरे मार्ग का सर्वे कर संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया जाए।
लाखा-तराईमाल मार्ग को मवेशी मुक्त कराने की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या का समाधान केवल हादसे के बाद मवेशियों को सड़क से हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
प्रशासन को-
लाखा से तराईमाल तक नियमित मवेशी हटाओ अभियान चलाना चाहिए।
खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
ढाबों के आसपास बेतरतीब पार्किंग पर सख्ती करनी चाहिए।
सड़क किनारे कचरा एवं जूठा भोजन फेंकने पर कार्रवाई करनी चाहिए।
संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश एवं चेतावनी संकेतक लगाने चाहिए।
मवेशियों के लिए रिफ्लेक्टिव/रेडियम पट्टी लगाने का अभियान चलाना चाहिए।
हादसों वाले स्थानों पर CCTV और निगरानी व्यवस्था बढ़ानी चाहिए।
गेरवानी में 5 गायों की मौत केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और मवेशी प्रबंधन की उस व्यवस्था पर सवाल है, जिसमें हादसा होने के बाद कार्रवाई की चर्चा तो होती है, लेकिन हादसे रोकने के लिए स्थायी इंतजाम कब होंगे—यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।



