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‘बहानेबाजी’ के अंत की शुरुआत: ‘काम की अधिकता’ का रोना अब नहीं चलेगा, एक जिले का प्रभार खत्म

📍 सारंगढ़-बिलाईगढ़/रायगढ़सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त व्यासनारायण साहू की कार्यशैली लंबे समय से सवालों और विवादों के घेरे में रही है। रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़—दो जिलों का प्रभार संभाल रहे साहू पर यह आरोप लगातार लगता रहा कि उन्होंने ‘काम की अधिकता’ को एक सुविधाजनक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया।

अब शासन के ताजा आदेश में उनसे एक जिले का प्रभार वापस लेकर इस ‘बहानेबाजी’ पर सीधा प्रहार किया गया है।

दो नावों की सवारी, जिम्मेदारी से दूरी

जनप्रतिनिधियों और किसानों का आरोप रहा है कि दो जिलों का प्रभार साहू के लिए जिम्मेदारी नहीं, बल्कि ढाल बन गया था।

रायगढ़ में शिकायत लेकर पहुंचे लोगों को सारंगढ़ की व्यस्तता बताई जाती थी।

सारंगढ़ के सवालों पर रायगढ़ के काम का हवाला देकर जवाब टाल दिया जाता था।

इसी बीच धान खरीदी से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद किसानों में भारी आक्रोश फैल गया, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। किसानों का कहना है कि समस्याओं के समाधान के बजाय लगातार टालमटोल की गई।

इस ‘इधर की बात उधर’ वाली कार्यशैली का असर दोनों जिलों की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जनसंतुष्टि पर साफ दिखाई देता रहा।

अब सिर्फ रायगढ़: जवाबदेही तय

शासन के आदेश के बाद अब साहू केवल रायगढ़ जिले तक सीमित रहेंगे। इसके साथ ही कई स्पष्ट संदेश सामने आए हैं—

अब ‘दूसरे जिले में व्यस्त’ होने का बहाना नहीं चलेगा।

लंबित कार्यों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा बढ़ गई है।

‘काम की अधिकता’ का पुराना तर्क अब टिकाऊ नहीं रह गया है।

जनता को अब परिणाम चाहिए, बहाने नहीं

यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि जब अधिकारी जनसेवा के बजाय बहानों को प्राथमिकता देने लगते हैं, तो ऐसे हस्तक्षेप आवश्यक हो जाते हैं।

“रायगढ़ और सारंगढ़ के बीच जिम्मेदारियों को फुटबॉल की तरह उछालने का दौर अब खत्म होना चाहिए। अब जनता को ‘व्यस्तता’ नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहिए।”

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