
टेंडर के 30 दिन के भीतर हर हाल में शुरू हो काम, लेटलतीफी पर सख्त हुए सचिव
बिलासपुर। सरकारी निर्माण कार्यों में देरी, लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर अब सीधे एक्शन की तैयारी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गुरुवार को बिलासपुर में निर्माणाधीन नेहरू चौक-दर्रीघाट 10 किलोमीटर फोरलेन सड़क का औचक निरीक्षण कर पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया। मौके पर काम की धीमी रफ्तार और अव्यवस्था देखकर सचिव ने अधिकारियों और ठेकेदारों की जमकर क्लास लगाई।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि निर्माण कार्यों में अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ काम पूरा होना चाहिए, अन्यथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जाए।

“एसी कमरों से बाहर निकलें अधिकारी, रोज करें मॉनिटरिंग”
निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव बंसल ने विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अब सिर्फ फाइलों में प्रगति दिखाने से काम नहीं चलेगा। मुख्य अभियंता से लेकर अनुविभागीय अधिकारियों तक को निर्देश दिए गए कि हर प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरणों की स्पष्ट डेडलाइन तय की जाए और रोजाना साइट पर जाकर मॉनिटरिंग की जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ठेकेदारों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कराना उनकी जिम्मेदारी है। लापरवाही या अनदेखी अब सीधे जवाबदेही तय करेगी।
टेंडर के 30 दिन के भीतर शुरू हो काम – PWD विभाग में टेंडर स्वीकृत होने के महीनों बाद तक काम शुरू नहीं होने की पुरानी व्यवस्था पर भी सचिव ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी निर्माण कार्य का टेंडर स्वीकृत होने के अधिकतम 30 दिन के भीतर जमीन पर काम शुरू होना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बड़े और अटके प्रोजेक्ट्स की खुलवाई फाइलें – समीक्षा बैठक में सचिव ने बिलासपुर जिले के कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित प्रोजेक्ट्स की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
कोनी-मोपका बायपास, जयरामनगर सीपत रोड बायपास, जयरामनगर रेलवे ओवरब्रिज (ROB), हाई कोर्ट परिसर का निर्माणाधीन ऑडिटोरियम, नया जेल भवन, बोदरी में OIC के लिए प्रस्तावित विश्राम भवन इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) से जुड़े लंबित कार्यों पर भी अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया।
“सड़कें सिर्फ बनें नहीं, सुंदर भी दिखें” निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे धूल से पटे डिवाइडर्स और खराब हो रही ग्रिल्स को देखकर सचिव ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़कों का रखरखाव और सौंदर्यीकरण भी उतना ही जरूरी है जितना उनका निर्माण। सचिव ने तत्काल डिवाइडर्स और ग्रिल्स का रंग-रोगन कर उन्हें व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल, PWD के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सचिव के इस सख्त रुख ने साफ संकेत दे दिया है कि अब निर्माण कार्यों में लापरवाही करने वालों पर सीधे कार्रवाई की गाज गिर सकती है।



