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रायगढ़ औद्योगिक हादसे का बड़ा खुलासा: चिराईपानी में गर्भवती महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल, लगभग सालभर पहले भी इसी उद्योग परिसर में गिरी थी दीवार; सुरक्षा व्यवस्था पर सवालों के घेरे में प्रबंधन

रायगढ़- रायगढ़-घरघोड़ा मुख्य मार्ग स्थित ग्राम चिराईपानी में संचालित ओम श्री रूपेश उद्योग परिसर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस घटना में एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। वहीं अब ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर मजदूर परिवारों को रहने के लिए रखा गया था, वहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी लंबे समय से की जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल गर्भवती महिला ने मलबे के नीचे ही दम तोड़ दिया था, जबकि आधिकारिक स्तर पर अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

लगभग सालभर पहले भी हुई थी दीवार गिरने की घटना

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग एक वर्ष पूर्व भी इसी उद्योग परिसर से जुड़े क्षेत्र में दीवार गिरने की एक घटना हुई थी। उस समय किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी, क्योंकि जिस हिस्से की दीवार गिरी थी उसकी ऊँचाई अपेक्षाकृत कम थी और आसपास कोई श्रमिक आवास भी नहीं था। इस कारण घटना गंभीर जनहानि में नहीं बदली, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वह घटना भविष्य के बड़े खतरे की चेतावनी थी।

ग्रामीणों का आरोप है कि उस घटना के बाद भी व्यापक सुरक्षा समीक्षा, संरचनात्मक जांच अथवा जोखिम मूल्यांकन नहीं कराया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि पूर्व घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे और संभावित खतरों को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई थी।

महालक्ष्मी कास्टिंग की दीवार और ओम श्री रूपेश के लेबर क्वार्टर

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस दीवार के गिरने से यह हादसा हुआ वह महालक्ष्मी कास्टिंग परिसर की थी, जबकि उसके समीप स्थित लेबर क्वार्टर में ओम श्री रूपेश उद्योग से जुड़े श्रमिक परिवार निवास कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों परिसरों की भौगोलिक स्थिति और वहां संचालित औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा संबंधी जोखिम पहले से मौजूद थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लेबर क्वार्टर से बेहद कम दूरी पर स्लैग (औद्योगिक अवशेष) का विशाल ढेर जमा था और उसी क्षेत्र में स्लैग प्रोसेसिंग तथा क्रेशर संचालन की गतिविधियां भी चल रही थीं। स्थानीय लोगों का दावा है कि लगातार कंपन और दबाव के कारण दीवार की स्थिति कमजोर होती जा रही थी।

मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे प्रश्न

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल मजदूर आवास की स्थिति को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि श्रमिक परिवारों को ऐसे स्थान पर रखा गया था जहां किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूर्व में हुई घटना के बाद सुरक्षा ऑडिट, संरचनात्मक निरीक्षण और जोखिम मूल्यांकन किया गया होता तो शायद इस दुखद घटना को रोका जा सकता था।

कैमरे के सामने सवालों से बचते नजर आए उद्योग प्रतिनिधि

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे पत्रकारों द्वारा जब जिम्मेदार पक्ष से घटना के संबंध में सवाल पूछे गए, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। मौके पर मौजूद उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों से सुरक्षा व्यवस्था, पूर्व घटना और वर्तमान हादसे को लेकर सवाल किए गए, लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

इस दौरान का वीडियो स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासनिक जांच से मिलेंगे कई अहम सवालों के जवाब – – घटना के बाद अब कई महत्वपूर्ण सवाल जांच एजेंसियों के सामने हैं—

क्या पूर्व में भी दीवार गिरने की घटना हुई थी?

यदि हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?

मजदूरों के आवास के लिए चुना गया स्थान सुरक्षा मानकों के अनुरूप था या नहीं?

स्लैग भंडारण और क्रेशर संचालन के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं?

गर्भवती महिला की मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं?

दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांगघटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, सरपंच, उपसरपंच सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों एवं श्रमिक परिवारों ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों, संबंधित प्रबंधन तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत जैसे गंभीर मामले में केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है।

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। पूरे मामले पर क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं और सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जो यह स्पष्ट करेगी कि इस दुखद हादसे के पीछे किन परिस्थितियों और संभावित चूकों की भूमिका रही।

घटना स्थल की दो तस्वीरे साभार THN

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