“चिराईपानी में ग्रामीणों का दबाव बढ़ा: ‘अग्रोहा प्लांट’ पर सवाल, जिला पंचायत सदस्य ने प्रक्रिया को बताया ‘गलत’”

📍 रायगढ़ (छत्तीसगढ़) | 18 अप्रैल 2026
ग्राम चिराईपानी में शासकीय भूमि पर ‘अग्रोहा प्लांट’ को जमीन दिए जाने को लेकर विवाद अब और तेज हो गया है। ग्रामीणों के विरोध और लगातार उठ रहे सवालों के बीच जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल ने भी स्पष्ट कहा है कि पंचायत द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया विधिक रूप से सही नहीं थी।
🔍 ग्रामीणों का दावा — “बिना जानकारी के जमीन देने की कोशिश”नवीन राजपूत, नटराज डनसेना, नीरज डनसेना सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की शासकीय भूमि को बिना पर्याप्त जानकारी दिए ‘अग्रोहा प्लांट’ के पक्ष में उपयोग करने की कोशिश की गई।ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सक्रियता और विरोध के कारण यह मामला सामने आया और अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

🏛️ गोपाल अग्रवाल का स्पष्ट रुख — जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि-
👉 “शासकीय भूमि के उपयोग को लेकर जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह विधिक रूप से सही नहीं है।”उनके इस बयान के बाद पंचायत की भूमिका पर सवाल और तेज हो गए हैं।
📢 ग्राम सभा और ग्रामीणों की दो-टूक मांग — हालिया बैठकों में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा है
पंचायत ने यदि जमीन देने की प्रक्रिया अपनाई है, तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी भी पंचायत की ही है
शासकीय भूमि को पूर्व स्थिति में लाया जाए‘
अग्रोहा प्लांट’ द्वारा की गई घेराबंदी और संरचनाएं हटाई जाएं
⚠️ “कागज नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए”
ग्राम सभा के रजिस्टर में बेदखली और कार्रवाई के प्रस्ताव दर्ज होने के बावजूद ग्रामीण अब भौतिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि —
👉 जब तक मौके से खंभे और तार नहीं हटाए जाते, विरोध जारी रहेगा
👉 आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा
🧭 अब अगली परीक्षा पंचायत की — यह मामला अब पंचायत के लिए अहम बन गया है।
👉 क्या प्रक्रिया की जांच होगी?
👉 क्या जमीन को पूर्व स्थिति में लाया जाएगा?
👉 क्या प्लांट प्रबंधन पर कार्रवाई होगी?
🎯 इम्पैक्ट लाइन — चिराईपानी में ग्रामीणों की एकजुटता और जनप्रतिनिधि के स्पष्ट रुख ने यह संकेत दे दिया है कि शासकीय भूमि से जुड़े निर्णय अब बिना सवालों के नहीं गुजरेंगे।



