
रायगढ़ | रायगढ़-धरमजयगढ़ मुख्य मार्ग के निर्माण में कथित लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है। महज एक साल पहले ‘बेहतर गुणवत्ता’ का दावा करते हुए जनता को सौंपी गई इस सड़क की असलियत अब उसके साइड शोल्डर्स के उखड़ने से उजागर हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत रायगढ़ की सहकारिता एवं उद्योग समिति के सभापति गोपाल अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

🔍 तकनीकी मानकों पर उठे गंभीर सवालसड़क निर्माण में साइड शोल्डर्स की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यही हिस्से भारी वाहनों के दबाव और बारिश के पानी से सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

लेकिन इस मार्ग पर स्थिति चिंताजनक है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि शोल्डर्स का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
सभापति गोपाल अग्रवाल ने सीधे सवाल उठाया है—
👉 “जब गुणवत्ता इतनी खराब थी, तो विभाग ने ठेकेदार को पूर्णता प्रमाण-पत्र किस आधार पर दिया?”
⚠️ 7 दिन का अल्टीमेटम, विभाग से 6 तीखे सवाल PWD से मांगी गई जानकारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है
निर्माण के दौरान की निरीक्षण रिपोर्ट कहाँ है?
क्या वर्तमान स्थिति तकनीकी रूप से संतोषजनक मानी जा सकती है?
DLP (दोष निवारण अवधि) में ठेकेदार को नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
कुटाई (Compaction) और लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
Completion Certificate देने का आधार क्या था?
मरम्मत और जवाबदेही तय करने का क्या एक्शन प्लान है?
🗣️ “गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा” — गोपाल अग्रवाल — प्रेस को जारी बयान में गोपाल अग्रवाल ने दो टूक कहा:“जनता के पैसे से बनी सड़क अगर एक साल में ही जवाब दे रही है, तो यह बेहद गंभीर लापरवाही है। हमने CEO जिला पंचायत को भी अवगत कराया है। PWD के जवाब के बाद अगली समीक्षा बैठक में सख्त कार्रवाई तय की जाएगी।”
🌧️ मानसून से पहले खतरे की घंटी — विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बारिश से पहले साइड शोल्डर्स की मरम्मत नहीं की गई, तो सड़क की नींव कमजोर होकर बीच से धंसने का खतरा बढ़ सकता है।अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि PWD तय समय में जवाब देकर सुधार करता है या फिर कार्रवाई की गाज गिरती है।




