रायगढ़

डाक कर्मचारी को मिली, जनप्रतिनिधि को नहीं! PWD के जवाब पर उठे नए सवाल

20 मई को भेजा गया स्पष्टीकरण, 25 मई को मिली जानकारी; मार्च में सूचना उपलब्ध कराने के दावे पर सवाल

गोपाल अग्रवाल ने उच्च अधिकारियों को भेजा प्रतिवेदन, विभागीय जवाबदेही पर उठाए प्रश्न

रायगढ़, 11 जून 2026।जिला पंचायत सदस्य एवं सहकारिता एवं उद्योग समिति के सभापति गोपाल अग्रवाल ने लोक निर्माण विभाग (PWD) रायगढ़ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए विभागीय लापरवाही, सूचना प्रेषण में बरती गई उदासीनता तथा जनप्रतिनिधि प्रोटोकॉल की अवहेलना का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया है।

मामला रायगढ़-धरमजयगढ़ मार्ग एवं लाखा-गेरवानी-चिरईपानी-देलारी मार्ग से संबंधित तकनीकी जानकारी का है, जिसकी मांग गोपाल अग्रवाल द्वारा फरवरी 2026 में जनहित एवं अपने वैधानिक दायित्वों के निर्वहन हेतु की गई थी। जानकारी उपलब्ध नहीं होने का विषय 7 मई 2026 को आयोजित जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया था।

इसके पश्चात कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग द्वारा 20 मई 2026 को जारी पत्र में दावा किया गया कि संबंधित जानकारी 17 मार्च 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से जिला पंचायत कार्यालय भेजी गई थी तथा 27 मार्च 2026 को कार्यालय के एक कर्मचारी द्वारा प्राप्त कर ली गई थी।

गोपाल अग्रवाल ने कहा कि विभाग का पत्र यह तो बताता है कि डाक किसी कर्मचारी द्वारा प्राप्त की गई, किंतु यह कहीं स्पष्ट नहीं करता कि संबंधित जानकारी मांगकर्ता जनप्रतिनिधि को कब और किस माध्यम से उपलब्ध कराई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जानकारी वास्तव में उपलब्ध करा दी गई थी, तो 7 मई को आयोजित सामान्य सभा में विभाग द्वारा इसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने बताया कि कार्यपालन अभियंता द्वारा 20 मई 2026 को जारी पत्र के साथ संबंधित दस्तावेज पुनः प्रेषित किए गए, जो उन्हें 25 मई 2026 को प्राप्त हुए। ऐसे में विभाग का यह दावा कि जानकारी मार्च माह में उपलब्ध करा दी गई थी, व्यवहारिक रूप से सही प्रतीत नहीं होता, क्योंकि जानकारी की वास्तविक प्राप्ति मई माह में हुई।

गोपाल अग्रवाल ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी को केवल कार्यालय भेज देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विभाग का दायित्व केवल डाक प्रेषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सूचना संबंधित जनप्रतिनिधि तक विधिवत पहुंचे। अन्यथा पूरी प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाती है।

उन्होंने कहा कि सामान्य सभा में उठे विषय के बाद प्रस्तुत विभागीय स्पष्टीकरण से यह आभास होता है कि वास्तविक जवाबदेही तय करने के बजाय औपचारिक पत्राचार के आधार पर स्थिति को निराकृत प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है। यदि सूचना वास्तव में उपलब्ध करा दी गई थी, तो सामान्य सभा के दौरान विभाग इस तथ्य को स्पष्ट करने में असफल क्यों रहा, यह स्वयं एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

गोपाल अग्रवाल ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक पारदर्शिता, विभागीय उत्तरदायित्व एवं सूचना प्रेषण की प्रक्रिया पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े हुए हैं। जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगी गई जानकारी के मामलों में केवल डाक पावती को आधार बनाकर विभागीय दायित्व की पूर्ति नहीं मानी जा सकती।

इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर रायगढ़, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अध्यक्ष जिला पंचायत, अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रतिलिपि प्रेषित कर मामले के परीक्षण एवं आवश्यक कार्यवाही की अपेक्षा की है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में विभाग जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगी गई सूचनाओं के मामलों में अधिक संवेदनशील, जवाबदेह एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाएगा, जिससे ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और प्रशासनिक विश्वसनीयता बनी रहे।

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