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धरमजयगढ़–लोहरदगा रेल लाइन: 29 प्रस्तावित स्टेशनों में 16 अकेले जशपुर में, जिले को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

रायगढ़/जशपुर। धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन को केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में ‘विशेष रेल परियोजना’ का दर्जा दिए जाने के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। परियोजना के प्रस्तावित अलाइनमेंट से संबंधित दस्तावेज में लोहरदगा से धरमजयगढ़ तक बनने वाली रेल लाइन पर प्रस्तावित स्टेशनों की सूची और उनकी दूरी का प्रारंभिक विवरण सामने आया है।

उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार लगभग 296.50 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर कुल 29 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 16 स्टेशन जशपुर जिले में प्रस्तावित हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ जशपुर अंचल को मिलने वाला है। लंबे समय से रेल संपर्क की मांग कर रहे जशपुर जिले के लिए यह परियोजना विकास की नई संभावनाएं लेकर आ सकती है।

जशपुर जिले में 16 प्रस्तावित स्टेशन – प्रारंभिक सूची के अनुसार जशपुर जिले में जशपुर नगर, बरगांव, बरटोली, थूती अम्बा, कस्तूरा, देवसांड, राइकेरा, कुनकुरी, बंदरचुवा, कांसाबेल, सराईटोला, पाकरगांव, पत्थलगांव, बरपाली, सिसरिंगा और अमापाली स्टेशन प्रस्तावित हैं।

रायगढ़ जिले में 3 स्टेशन – रेल लाइन के छत्तीसगढ़ हिस्से में रायगढ़ जिले के अंतर्गत धरमजयगढ़, दुर्गापुर और धरमजयगढ़ रोड स्टेशन प्रस्तावित बताए गए हैं। इससे धरमजयगढ़ क्षेत्र को भी सीधे रेल संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।

झारखंड में 10 स्टेशन प्रस्तावित – वहीं झारखंड क्षेत्र में लोहरदगा, सेन्हा, गम्हरिया, घाघरा, टोटो, गुमला, नवागढ़, राइडीह, लोडम और बराकरंजा स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह रेल लाइन झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी।

पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेगा पूरा अंचल

जशपुर, कुनकुरी और पत्थलगांव क्षेत्र आजादी के बाद से ही रेल नेटवर्क से वंचित रहे हैं। वर्तमान में यहां के लोगों को रेल यात्रा के लिए रायगढ़, चांपा, रांची अथवा अन्य दूरस्थ रेलवे स्टेशनों तक जाना पड़ता है। रेल लाइन बनने के बाद पूरा अंचल सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा – इस रेल परियोजना से न केवल आम नागरिकों को लाभ मिलेगा बल्कि कृषि, वनोपज, स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। साथ ही क्षेत्र के युवाओं को रोजगार एवं उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है। यह रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्रों को भी जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अंतिम डीपीआर में संभव हैं बदलाव – रेलवे सूत्रों के अनुसार सामने आई सूची प्रस्तावित अलाइनमेंट और प्रारंभिक सर्वे का हिस्सा है। अंतिम सर्वेक्षण, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), तकनीकी स्वीकृतियों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान स्टेशन संख्या अथवा स्थानों में परिवर्तन संभव है। हालांकि परियोजना को विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह रेल लाइन तय समय में पूरी होती है तो जशपुर, पत्थलगांव और धरमजयगढ़ सहित पूरे आदिवासी अंचल की विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी और दशकों पुराना रेल संपर्क का सपना साकार हो सकेगा।

फोटो सांकेतिक

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