रायगढ़

रायगढ़ औद्योगिक हादसे का बड़ा खुलासा: दस्तावेजों में ‘ग्रीन बेल्ट’, जमीन पर क्रेशर प्लांट; चिराईपानी में गर्भवती महिला की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल

रायगढ़ (चिराईपानी)। चिराईपानी स्थित औद्योगिक परिसर में दीवार गिरने से गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की हुई दर्दनाक मौत के बाद मामले में कई गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं। हादसे के बाद उपलब्ध जियो-टैग्ड तस्वीरों, स्थानीय दावों और मौके से मिली जानकारियों ने उद्योग परिसर में सुरक्षा मानकों, ग्रीन बेल्ट व्यवस्था, स्लैग प्रबंधन और श्रमिक आवास संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिस क्षेत्र को उद्योग के स्वीकृत लेआउट में हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) के रूप में विकसित किया जाना था, उसी क्षेत्र में क्रेशर प्लांट संचालित किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके साथ ही इसी क्षेत्र के समीप श्रमिक परिवारों के लिए आवासीय व्यवस्था किए जाने का भी दावा किया जा रहा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर विषय बन सकता है।

बरसात में स्लैग से निकलने वाले पानी को लेकर ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षा ऋतु के दौरान उद्योग परिसर में जमा स्लैग के बड़े भंडारण क्षेत्र से निकलने वाला प्रदूषित पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलता है। उनका दावा है कि यह पानी खेतों तक पहुंचकर कृषि भूमि की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। क्षेत्र के कई पुराने पेड़ों के सूखने को भी स्थानीय लोग इसी संभावित प्रदूषण से जोड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने जल एवं मिट्टी की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

सूखे मौसम में धूल प्रदूषण को लेकर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात समाप्त होने के बाद स्लैग का भंडारण क्षेत्र सूखने लगता है, जिससे अत्यंत महीन धूल उत्पन्न होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर प्लांट के संचालन के दौरान यह धूल हवा के साथ आसपास के गांवों और कृषि क्षेत्रों तक पहुंचती है। उनका कहना है कि पर्याप्त धूल नियंत्रण उपायों, विंड ब्रेकर, ग्रीन बेल्ट अथवा प्रभावी जल छिड़काव व्यवस्था के अभाव में स्थिति और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि लंबे समय तक ऐसी धूल के संपर्क में रहने से लोगों और पशुधन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके मद्देनजर उन्होंने वायु गुणवत्ता परीक्षण और स्वास्थ्य सर्वेक्षण की मांग की है।

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बची हुई दीवार की स्थिति को लेकर चिंता

हादसे के बाद सामने आई तस्वीरों में शेष दीवार और उसके संरचनात्मक हिस्सों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीवार के कुछ हिस्सों में पहले से दबाव और क्षति के संकेत दिखाई दे रहे थे। वहीं दीवार के समीप की गई खुदाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी तकनीकी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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लगभग एक वर्ष पहले भी गिरी थी दीवार

ग्रामीणों के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व भी इसी औद्योगिक परिसर में दीवार गिरने की घटना हुई थी। उस समय किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन घटना के बाद सुरक्षा ऑडिट, संरचनात्मक परीक्षण और जोखिम मूल्यांकन जैसे आवश्यक कदम उठाए गए थे या नहीं, यह अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

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सड़क धंसने की शिकायतें

स्थानीय नागरिकों ने उद्योग परिसर के आसपास की सार्वजनिक सड़क को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पूर्व में सड़क की खुदाई के बाद उचित तकनीकी मानकों के अनुरूप पुनर्स्थापना नहीं किए जाने से कई स्थानों पर सड़क धंसने की स्थिति बन रही है, जिससे भविष्य में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

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कंपन और दबाव की भूमिका की जांच की मांग

ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त दीवार के एक ओर स्लैग का बड़ा भंडारण था, जबकि आसपास क्रेशर संचालन भी किया जा रहा था। उनका मानना है कि लगातार होने वाले कंपन तथा दीवार पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव की भूमिका की भी विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

घटना के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने, सुरक्षा मानकों के पालन की समीक्षा करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।

चिराईपानी की यह दर्दनाक घटना अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना भर नहीं रह गई है। सामने आ रहे तथ्य, स्थानीय दावे और उपलब्ध दस्तावेज कई ऐसे सवाल खड़े कर रहे हैं जिनका जवाब जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों को देना होगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का समय पर पालन किया गया होता, तो क्या इस दुखद घटना को टाला जा सकता था। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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